दरभंगा DMCH की शर्मनाक तस्वीर: लावारिस मरीज को ट्रॉली की जगह फर्श पर घसीटकर ले गया सुरक्षाकर्मी, अधीक्षक ने कार्रवाई का दिया भरोसा
दरभंगा: उत्तर बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शामिल दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) से मानवता को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में एक लावारिस मरीज को ट्रॉली से ले जाने के बजाय एक सुरक्षाकर्मी द्वारा फर्श पर घसीटकर ले जाने का वीडियो सामने आया है। घटना ने अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, उक्त मरीज को करीब तीन दिन पहले पुलिस द्वारा DMCH के इमरजेंसी विभाग में लाया गया था। मरीज की पहचान झंझारपुर निवासी के रूप में बताई जा रही है। उसकी हालत ऐसी थी कि वह अपने बारे में पूरी जानकारी देने की स्थिति में नहीं था। आरोप है कि अस्पताल परिसर में तीन दिनों तक रहने के बावजूद उसका विधिवत दाखिला नहीं किया गया और उसे समुचित इलाज भी नहीं मिल सका।
स्थानीय लोगों ने कटाया पांच रुपये का पुर्जा
बताया जा रहा है कि मरीज की हालत देखकर अस्पताल में मौजूद स्थानीय लोगों और कुछ मरीजों के परिजनों ने पांच रुपये का पुर्जा कटवाकर उसके इलाज की पहल की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मरीज को आर्थोपेडिक इमरजेंसी से ट्रायज एरिया की ओर ले जाने के लिए कहा गया था।
मरीज को दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए ट्रॉली उपलब्ध कराने के बजाय एक सुरक्षाकर्मी ने उसका हाथ पकड़ा और उसे फर्श पर घसीटते हुए ट्रायज एरिया तक पहुंचाया। इस दौरान वहां मौजूद मरीजों और उनके परिजनों ने जब यह दृश्य देखा तो वे भी हैरान रह गए।
इमरजेंसी में ट्रॉलियां मौजूद होने के बावजूद नहीं किया इस्तेमाल
घटना को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इमरजेंसी विभाग में मरीजों को लाने-ले जाने के लिए ट्रॉलियों की व्यवस्था होने के बावजूद गंभीर हालत में पड़े मरीज को फर्श पर घसीटकर क्यों ले जाया गया। अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि मरीज पहले से ही गंभीर हालत में था और उसे सहारे के साथ सुरक्षित तरीके से ले जाने की जरूरत थी।
तीन दिनों तक भर्ती नहीं होने पर भी उठे सवाल
इस घटना ने सिर्फ सुरक्षाकर्मी के व्यवहार पर ही सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि लावारिस मरीजों की देखभाल को लेकर अस्पताल की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि मरीज करीब तीन दिनों से अस्पताल परिसर में था, लेकिन उसका विधिवत दाखिला नहीं हुआ।
लावारिस मरीजों के इलाज, दवा और भोजन की व्यवस्था अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी मानी जाती है। ऐसे मरीजों की पहचान और देखभाल के लिए भी स्वास्थ्य व्यवस्था में प्रावधान हैं। इसके बावजूद इतने बड़े चिकित्सा संस्थान में एक मरीज का तीन दिनों तक समुचित इलाज और भर्ती प्रक्रिया से बाहर रहना गंभीर लापरवाही का संकेत माना जा रहा है।
अधीक्षक ने कहा- ऐसा व्यवहार बिल्कुल उचित नहीं
मामला सामने आने के बाद DMCH अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा ने कहा कि इमरजेंसी विभाग में मरीजों की सुविधा के लिए हेल्थ मैनेजर की तैनाती की गई है और मरीजों को लाने-ले जाने के लिए पर्याप्त ट्रॉलियां उपलब्ध हैं।
अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि मरीज के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने हेल्थ मैनेजर को मरीज को तत्काल भर्ती कराने और उसका समुचित इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश देने की बात कही है।
साथ ही उन्होंने कहा कि मरीज को फर्श पर घसीटकर ले जाने वाले सुरक्षाकर्मी की पहचान कर उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो सामने आने के बाद व्यवस्था पर सवाल
घटना का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि इलाज के लिए आने वाला मरीज चाहे लावारिस हो या उसके साथ परिवार का कोई सदस्य मौजूद हो, उसे सम्मान और मानवीय व्यवहार के साथ चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए।
DMCH जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में इस तरह की घटना सामने आना अस्पताल प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अब देखना होगा कि मामले में संबंधित सुरक्षाकर्मी की पहचान के बाद क्या कार्रवाई होती है और लावारिस मरीजों की भर्ती, इलाज और देखभाल की व्यवस्था को लेकर अस्पताल प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है।