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Thursday, August 13, 2026

BIHAR:कटिहार की लक्ष्मी पैरों से लिखकर करती है पढ़ाई:जन्म से नहीं हैं हाथ, शिक्षक बनने का है सपना

कटिहार की लक्ष्मी बनी मिसाल: हाथ नहीं हैं, फिर भी पैरों से लिखकर पढ़ाई कर रही 13 साल की छात्रा

कटिहार: हौसला और मेहनत के आगे शारीरिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं। कटिहार की 13 वर्षीय लक्ष्मी इसकी मिसाल हैं। जन्म से दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद लक्ष्मी पैरों की उंगलियों के बीच पेन पकड़कर पढ़ाई करती हैं। उनका सपना बड़ा होकर शिक्षिका बनने का है।

लक्ष्मी हसनगंज प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय भतोरिया में कक्षा चार की छात्रा हैं। वह नियमित रूप से स्कूल आती हैं और पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी उत्साह से हिस्सा लेती हैं। स्कूल में मिलने वाले शैक्षणिक कार्यों को वह खुद पैरों की मदद से पूरा करती हैं।

पैरों से लिखती हैं, खुद पलटती हैं कॉपी के पन्ने

लक्ष्मी अपने पैरों की उंगलियों के बीच पेन फंसाकर कॉपी पर लिखती हैं। इतना ही नहीं, वह पैरों की मदद से बैग से कॉपी निकालने और उसके पन्ने पलटने जैसे काम भी करती हैं। उनकी लगन देखकर विद्यालय के शिक्षक और दूसरे बच्चे भी उनका उत्साह बढ़ाते हैं।

लक्ष्मी का कहना है कि उन्हें पढ़ाई करना बहुत पसंद है। वह आगे चलकर शिक्षिका बनना चाहती हैं और अपने पैरों पर खड़ी होकर आत्मनिर्भर जीवन जीने का सपना देखती हैं।

शिक्षक बोले- लक्ष्मी को विशेष सुविधाओं की जरूरत

विद्यालय की शिक्षिका रिंकू कुमारी ने बताया कि लक्ष्मी दूसरे बच्चों की तरह ही पढ़ाई में रुचि लेती हैं। उनकी मेहनत और लगन प्रेरणादायक है। शिक्षकों ने सरकार से लक्ष्मी को आवश्यक सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि उनकी पढ़ाई में किसी तरह की परेशानी न आए।

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लक्ष्मी की जांच की है और उन्हें 100 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया है।

मजदूरी कर माता-पिता पढ़ा रहे बेटी को

लक्ष्मी की मां रेणु देवी ने बताया कि बेटी के जन्म के समय कुछ लोगों ने उसे त्यागने की सलाह दी थी, लेकिन परिवार ने ऐसा नहीं किया। माता-पिता मजदूरी करके बेटी की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं।

परिवार का सपना है कि लक्ष्मी पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बने और अपने पैरों पर खड़ी हो। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद माता-पिता उसकी पढ़ाई जारी रखने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने हरसंभव मदद का दिया भरोसा

हसनगंज के प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आयुष भारद्वाज ने पुष्टि की कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बच्ची की जांच की है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से लक्ष्मी को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

लक्ष्मी की कहानी यह संदेश देती है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए साधन नहीं, बल्कि मजबूत हौसले और लगातार मेहनत की जरूरत होती है।