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Saturday, August 15, 2026

BIHAR:'पैसे-नौकरी रख लीजिए, पहले मेरे बेटे को न्याय दीजिए' भरत तिवारी की मां का बड़ा बयान, शहीद का दर्जा देने की मांग

आरा(भोजपुर)। भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में परिवार ने सरकार की आर्थिक मदद और नौकरी के ऐलान से अलग अपनी सबसे बड़ी मांग सामने रखी है।भरत तिवारी की मां आशा देवी ने साफ कहा कि परिवार को पैसे या नौकरी से ज्यादा बेटे के लिए न्याय चाहिए।उन्होंने सरकार से भरत तिवारी को शहीद का दर्जा देने की मांग की है।

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भरत तिवारी के घर के बाहर तिरंगा फहराया गया। परिवार और गांव के लोग इस दौरान मौजूद रहे और तिरंगे को सलामी दी। इसी मौके पर परिवार ने एक बार फिर भरत तिवारी के लिए न्याय की आवाज उठाई।

मां बोलीं- मदद नहीं, बेटे के लिए न्याय चाहिए

आशा देवी का कहना है कि सरकार की ओर से आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा अपनी जगह है, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता बेटे को न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि परिवार चाहता है कि भरत तिवारी को शहीद का दर्जा मिले।

मां ने मामले में आरोपित पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की। उनका कहना है कि जिन लोगों पर गंभीर आरोप हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार का जोर अब मुआवजे से ज्यादा जांच और कार्रवाई के नतीजे पर है।भाई ने भी साफ किया एजेंडा, 'पहले दोषियों पर हो कार्रवाई'

भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने सरकार की आर्थिक मदद और नौकरी के ऐलान का स्वागत किया।

हालांकि उन्होंने भी परिवार की पहली मांग न्याय को बताया। उनका कहना है कि मामले में जिन लोगों पर आरोप हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

परिवार का कहना है कि जो आरोपी अभी तक बाहर हैं, उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए। उनके मुताबिक दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने के बाद ही परिवार को वास्तविक न्याय मिल सकेगा।

इस मांग ने एक बार फिर एनकाउंटर की परिस्थितियों और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अंतरिम रिपोर्ट के बाद बदली तस्वीर

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच न्यायिक जांच आयोग कर रहा है। आयोग की अंतरिम रिपोर्ट बिहार सरकार को सौंपी जा चुकी है।इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परिवार के लिए आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।

लेकिन अब परिवार की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। आशा देवी का संदेश साफ है कि सहायता से ज्यादा उन्हें बेटे के मामले में न्याय चाहिए।

साथ ही वह चाहती हैं कि भरत तिवारी को शहीद का दर्जा मिले। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंतरिम रिपोर्ट के बाद सरकार की अगली कार्रवाई क्या होगी और परिवार की न्याय की मांग पर क्या फैसला लिया जाएगा।