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Thursday, August 20, 2026

बिहार के छात्रों को अब स्टूडेंट कार्ड से नहीं मिलेगा 4 लाख का लोन, सरकार ने राशि को 2 लाख घटाया

पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने छात्रों की उच्च शिक्षा से जुड़ी बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा बदलाव किया है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 19 अगस्त को जारी नए आदेश के बाद अब इस योजना के तहत छात्रों को अधिकतम दो लाख रुपये तक ही शिक्षा ऋण मिलेगा। इससे पहले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए अधिकतम चार लाख रुपये तक ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान था। नई व्यवस्था के अनुसार, जिन छात्रों को दो लाख रुपये से अधिक की आवश्यकता होगी, उन्हें अतिरिक्त शिक्षा ऋण के लिए प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। इस ऋण की प्रक्रिया अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के माध्यम से पूरी की जाएगी। छात्र अपनी सुविधा के अनुसार पोर्टल पर उपलब्ध बैंक और उसकी शाखा का चयन कर सकेंगे। जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्रों पर भी विद्यार्थियों को आवेदन करने की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना राज्य की महत्वपूर्ण छात्र कल्याण योजनाओं में शामिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सात निश्चय योजना के तहत इसे 2 अक्टूबर 2016 से लागू किया गया था। योजना का मुख्य उद्देश्य 12वीं कक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना था, ताकि आर्थिक कमजोरी के कारण किसी छात्र की पढ़ाई बाधित न हो। योजना शुरू होने के बाद अब तक 4.81 लाख से अधिक छात्रों के आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनमें 4.15 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लगभग 8,865 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है। वहीं इस अवधि में करीब 15,801 करोड़ रुपये के शिक्षा ऋण स्वीकृत किए गए हैं। योजना के पोर्टल पर बिहार और राज्य के बाहर के कुल 3,429 शिक्षण संस्थान सूचीबद्ध हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने अपने नए आदेश में कहा है कि योजना के संचालन के दौरान प्राप्त अनुभवों और उपलब्धियों को देखते हुए मौजूदा परिस्थितियों में इसे अधिक प्रभावी, लक्षित और वित्तीय रूप से दीर्घकाल तक संचालित करने योग्य बनाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से योजना की ऋण सीमा और व्यवस्था में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था में ब्याज राहत से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। पहले बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए चार प्रतिशत ब्याज दर का प्रावधान था। वहीं छात्राओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर लाभार्थियों को एक प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता था। अब दो लाख रुपये से अधिक के शिक्षा ऋण के लिए बैंकिंग व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी पोर्टल का सहारा लेना होगा। बैंकों द्वारा दिए जाने वाले शिक्षा ऋण पर पढ़ाई की अवधि और ऋण चुकाने से पहले मिलने वाली निर्धारित मोहलत की अवधि के दौरान देय ब्याज में नियमों के अनुसार ब्याज अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नियमित और समय पर ऋण चुकाने वाले लाभार्थियों को 30 प्रतिशत तक ब्याज प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई है। छात्राओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर लाभार्थियों को इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत ब्याज प्रोत्साहन मिल सकता है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल छात्रों को ऋण उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उनमें जिम्मेदार ऋण व्यवहार विकसित करना, उनकी ऋण साख का इतिहास तैयार करना और उन्हें औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना भी है। हालांकि, चार लाख रुपये से घटाकर दो लाख रुपये की सीमा तय किए जाने से अधिक खर्च वाले पाठ्यक्रमों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के सामने चुनौती खड़ी हो सकती है। निजी संस्थानों, तकनीकी, चिकित्सा और अन्य महंगे पाठ्यक्रमों में दो लाख रुपये से अधिक की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे छात्रों को अब अतिरिक्त राशि के लिए बैंकों के माध्यम से आवेदन करना होगा। प्रधानमंत्री विद्या लक्ष्मी योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों में मेरिट के आधार पर प्रवेश लेने वाले पात्र छात्रों को शिक्षा ऋण की सुविधा दी जाती है। इसके अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को बिना संपत्ति गिरवी रखे और बिना गारंटर के शिक्षा ऋण मिलने का प्रावधान है। हालांकि ब्याज दर सभी बैंकों में एक समान नहीं है और संबंधित बैंक अपनी शर्तों के अनुसार इसे निर्धारित करते हैं। सरकार के अनुसार बिहार में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात वर्तमान में 17.1 प्रतिशत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह लगभग 28.4 प्रतिशत है। राज्य सरकार इसे बढ़ाकर राष्ट्रीय औसत के बराबर और आगे 30 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ऐसे में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में किया गया यह बदलाव छात्रों की उच्च शिक्षा और नामांकन के लक्ष्य को किस हद तक प्रभावित करता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।