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Friday, August 21, 2026

मधेपुरा में बनेंगे 200 और इलेक्ट्रिक मालगाड़ी इंजन! रेलवे-अल्सटॉम के बीच चल रही बातचीत, 2028 तक पूरा होगा 800 इंजन का ऑर्डर

मधेपुरा में बनेंगे 200 और इलेक्ट्रिक मालगाड़ी इंजन! रेलवे-अल्सटॉम के बीच चल रही बातचीत, 2028 तक पूरा होगा 800 इंजन का ऑर्डर

मधेपुरा: बिहार के मधेपुरा स्थित अल्सटॉम के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव संयंत्र से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय रेलवे फ्रांसीसी रेल उपकरण कंपनी अल्सटॉम के साथ मधेपुरा प्लांट में 200 और इलेक्ट्रिक मालगाड़ी इंजन बनवाने को लेकर बातचीत कर रहा है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

अल्सटॉम की संयुक्त इकाई मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड (एमईएलपीएल) के प्रबंध निदेशक विवेक गर्ग ने बताया कि मौजूदा 800 इलेक्ट्रिक मालगाड़ी इंजनों का ऑर्डर मार्च 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा।

अब तक 650 इलेक्ट्रिक इंजन की आपूर्ति

विवेक गर्ग के अनुसार, मधेपुरा संयंत्र से अब तक 650 इलेक्ट्रिक रेल इंजन भारतीय रेलवे को सप्लाई किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे और अल्सटॉम के बीच हुए समझौते के तहत रेलवे को इसी संयंत्र से 200 और इलेक्ट्रिक इंजन का ऑर्डर देने का विकल्प है।

हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। रेलवे और कंपनी के बीच संयंत्र के बेहतर इस्तेमाल को लेकर बातचीत चल रही है।

दूसरे रेल उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं

कंपनी के अधिकारी के मुताबिक मधेपुरा संयंत्र का इस्तेमाल भविष्य में केवल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। रेलवे से जुड़े अन्य उत्पादों के विनिर्माण के लिए भी इस अत्याधुनिक संयंत्र का उपयोग किए जाने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।

इससे मधेपुरा का यह प्लांट आने वाले वर्षों में रेलवे के लिए एक महत्वपूर्ण विनिर्माण केंद्र बन सकता है।

2015 में बना था संयुक्त उद्यम

भारतीय रेलवे और अल्सटॉम ने वर्ष 2015 में मधेपुरा में 800 इलेक्ट्रिक इंजन के निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम कंपनी एमईएलपीएल का गठन किया था। इस संयुक्त उद्यम में रेल मंत्रालय की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

मधेपुरा में स्थापित यह संयंत्र देश में भारी क्षमता वाले इलेक्ट्रिक मालगाड़ी इंजन के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है।

2048-49 तक कंपनी के पास रहेगी जमीन

विवेक गर्ग ने बताया कि संयंत्र के लिए जमीन 35 साल के पट्टे पर दी गई है और यह वर्ष 2048-49 तक कंपनी के पास रहेगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी संयंत्र में स्थापित मशीनरी और अन्य बुनियादी ढांचा मौजूद रहेगा।

परियोजना ने देश की अर्थव्यवस्था में दिया बड़ा योगदान

एक स्वतंत्र सामाजिक-आर्थिक प्रभाव आकलन अध्ययन के अनुसार, मधेपुरा इलेक्ट्रिक इंजन परियोजना ने वित्त वर्ष 2020-26 के दौरान देशभर में करीब 60,000 करोड़ रुपये के आर्थिक उत्पादन में योगदान दिया।

अध्ययन के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 में मधेपुरा स्थित एमईएलपीएल संयंत्र का बिहार के कुल जीएसटी संग्रह में करीब एक प्रतिशत योगदान रहा।

मधेपुरा में रेलवे के इस बड़े औद्योगिक संयंत्र के विस्तार की संभावित योजना से बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यदि 200 अतिरिक्त इंजनों का ऑर्डर मंजूर होता है, तो आने वाले वर्षों में संयंत्र की उत्पादन क्षमता और उपयोगिता दोनों बढ़ सकती हैं।