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Thursday, August 6, 2026

मधेपुरा में स्कूल बना तबेला! 13 साल से परिसर में बंध रहे मवेशी, गोबर-कीचड़ के बीच पढ़ने को मजबूर 417 बच्चे

मधेपुरा में स्कूल बना तबेला! 13 साल से परिसर में बंध रहे मवेशी, गोबर-कीचड़ के बीच पढ़ने को मजबूर 417 बच्चे

मधेपुरा। जिले के मुरलीगंज प्रखंड की सिंगियान पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, रानीपट्टी में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। विद्यालय परिसर में पिछले 13 वर्षों से कथित अतिक्रमण के कारण मवेशी बांधे जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि जहां बच्चों को खेलना और पढ़ना चाहिए, वहां गोबर, कीचड़ और मवेशियों का डेरा लगा हुआ है। इससे विद्यालय के 417 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

स्कूल परिसर में 17 नाद, मैदान बना तबेला

स्थानीय लोगों द्वारा विद्यालय की जमीन पर कथित रूप से 17 नाद रखकर मवेशी बांधे जा रहे हैं। बरसात के मौसम में पूरा परिसर कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे बच्चों और शिक्षकों को विद्यालय आने-जाने में भारी परेशानी होती है।

प्रभारी प्रधानाध्यापक ने लगाए गंभीर आरोप

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक हारून रशीद ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण हटाने की बात कहने पर कुछ लोग समूह बनाकर विद्यालय पहुंच जाते हैं और शिक्षकों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि झूठे मुकदमे और एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी जाती है। उनके अनुसार, कई बार विद्यालय का बरामदा भी स्थानीय लोगों के जमावड़े का स्थान बन जाता है, जिससे पठन-पाठन बाधित होता है।

कई शिकायतें, लेकिन कार्रवाई नहीं

विद्यालय प्रशासन ने इस मामले में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ), जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और अंचलाधिकारी (सीओ) को कई बार लिखित शिकायत दी है। इसके बावजूद अब तक अतिक्रमण हटाने की ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

डीईओ बोले- जल्द हटाया जाएगा अतिक्रमण

जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी विभाग को है। उन्होंने कहा कि पहले भी नोटिस जारी किया गया था और अब अंचलाधिकारी को दोबारा रिमाइंडर भेजा जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही विद्यालय परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

लगातार 13 वर्षों से विद्यालय परिसर में अतिक्रमण बने रहने से शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए विद्यालय परिसर को जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाना चाहिए, ताकि उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण में शिक्षा मिल सके।