जमीन पर कब्जे को लेकर परिवार आमरण अनशन पर
दबंगों पर प्रताड़ना का आरोप, डीएम से लगाई गुहार; कार्रवाई नहीं होने का दावा
सहरसा। सहरसा में एक महादलित परिवार प्रशासनिक उदासीनता और कथित दबंगई से परेशान होकर आमरण अनशन पर बैठ गया है। सौरबाजार प्रखंड निवासी विष्णुदेव पासवान ने कलेक्ट्रेट के समीप स्टेडियम परिसर में अनशन शुरू कर न्याय की मांग की है। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर उचित कार्रवाई की गुहार लगाई है।
पीड़ित विष्णुदेव पासवान के अनुसार, बिहार सरकार द्वारा उन्हें मौजा सौरबाजार (थाना संख्या-104, खाता संख्या-158, खेसरा संख्या-1245) के अंतर्गत 4 डिसमिल जमीन का वासगीत पर्चा आवंटित किया गया है। इस भूमि का दाखिल-खारिज भी हो चुका है और वे नियमित रूप से सरकारी लगान जमा कर रहे हैं।
पीड़ित ने बताया कि वर्षों से इसी जमीन पर उनका ईंट-खपरैल का मकान बना हुआ है, जहां वे अपने परिवार के साथ निवास करते हैं।
दबंगों पर धमकी और मारपीट का आरोप
विष्णुदेव पासवान ने आरोप लगाया कि परशुराम यादव, प्रकाश यादव, इन्दल यादव, कलानंद यादव, रामा यादव, श्यामा यादव, पाना यादव और नवल किशोर यादव समेत कुछ अन्य लोग लगातार उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं।
उनका कहना है कि आरोपी हथियारों से लैस होकर आते हैं, घर खाली करने का दबाव बनाते हैं और विरोध करने पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारपीट करते हैं।
2015 में घर में आग लगाने का आरोप
पीड़ित ने आरोप लगाया कि वर्ष 2015 में भी इन्हीं लोगों ने उनके घर में आग लगा दी थी। इसकी शिकायत उन्होंने अंचल अधिकारी (सीओ) से की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने बताया कि स्थानीय थाना और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन देने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला।
पहले भी कर चुके हैं अनशन
पीड़ित के अनुसार, 20 मई को भी वे आमरण अनशन पर बैठे थे। उस समय सहरसा अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने **** के अंचल अधिकारी को आदेश दिया था कि वासगीत पर्चा वाली जमीन पर कब्जा दिलाकर सीमांकन (बाउंड्रीवॉल) कराया जाए।
हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि आज तक उस आदेश पर अमल नहीं किया गया।
दोबारा शुरू किया आमरण अनशन
विष्णुदेव पासवान ने बताया कि 23 जून को जब वे दोबारा अनशन पर बैठे, तब रात करीब 12 बजे अंचल अधिकारी और राजस्व अधिकारी ने उन्हें जबरन धरना स्थल से हटाकर सहरसा स्टेडियम पहुंचा दिया।
उनका आरोप है कि अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला टाल दिया।
प्रशासनिक टालमटोल से निराश होकर उन्होंने 2 जुलाई से पुनः आमरण अनशन शुरू कर दिया है।
न्याय और सुरक्षा की मांग
पीड़ित ने जिलाधिकारी से मांग की है कि उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो तथा जमीन की मापी कराकर बाउंड्रीवॉल के साथ उन्हें पूर्ण कब्जा दिलाया जाए।