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सीतामढ़ी में महिला सिपाही ने थानाध्यक्ष पर यौन उत्पीड़न का लगाया आरोप, एसपी से की निष्पक्ष जांच व तबादले की मांग
सीतामढ़ी:
बिहार के सीतामढ़ी जिले के कन्हौली थाना में तैनात एक महिला सिपाही ने थानाध्यक्ष अमृत कुमार पाल पर यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया है। गृह रक्षा वाहिनी में कार्यरत महिला सिपाही ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को लिखित आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच, सुरक्षा और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। एसपी ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
ड्यूटी से लौटने के बाद हुई कथित घटना
शिकायत के अनुसार, घटना 20 जुलाई की रात करीब 1:30 से 2:00 बजे के बीच की है। महिला सिपाही ने बताया कि ड्यूटी समाप्त होने के बाद वह कन्हौली थाना स्थित महिला बैरक पहुंची, लेकिन उसके कमरे का दरवाजा नहीं खुल रहा था। इसी दौरान थानाध्यक्ष का फोन आया और उन्होंने उसे नीचे स्थित एक कमरे की जांच करने के लिए कहा।
अनुचित व्यवहार का आरोप
महिला सिपाही का आरोप है कि कमरे के बाहर अंधेरा होने के कारण उसने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाई। जैसे ही थानाध्यक्ष ने कमरा खोला, उन्होंने फ्लैशलाइट बंद करने को कहा और उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि थानाध्यक्ष ने उसकी पीठ पर हाथ रखा और विरोध करने पर उसके गाल को भी छुआ। महिला सिपाही का कहना है कि वह घबरा गई और असुरक्षित महसूस करते हुए कमरे के अंदर नहीं गई।
तबादले और सुरक्षा की मांग
घटना के बाद महिला सिपाही ने तत्काल अपने वरिष्ठ अधिकारियों से तबादले की मांग की। उसका कहना है कि वह अब उस थाना परिसर में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती और निष्पक्ष जांच के साथ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग की है।
ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी
महिला सिपाही ने दावा किया है कि घटना के बाद उसने अपने बड़े भाई को पूरी जानकारी दी। शिकायत के साथ उसने अपने भाई और थानाध्यक्ष के बीच हुई कथित कॉन्फ्रेंस कॉल की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के रूप में पुलिस अधीक्षक को सौंपी है।
एसपी ने दिए जांच के आदेश
सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक ने मामले की शिकायत मिलने के बाद इसकी जांच के निर्देश दिए हैं। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नोट: महिला सिपाही द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच अभी जारी है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल संबंधित थानाध्यक्ष का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।