बगहा (पश्चिम चंपारण)। Janki Devi Snake Catcher: बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां सैकड़ों विषैले सांपों का रेस्क्यू कर चुकीं एक जांबाज महिला खुद किंग कोबरा के डंक का शिकार हो गईं।
वाल्मीकिनगर पंचायत के बिसहा गांव (बगीचा टोला) की रहने वाली जानकी देवी ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बार फिर बहादुरी की मिसाल पेश की और करीब 10 फीट लंबे जहरीले किंग कोबरा को काबू में किया।
हालांकि, इस दौरान सांप ने उन्हें काट लिया, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहत की बात यह है कि उपचार के बाद उनकी हालत में अब सुधार हो रहा है।
घर में घुसा 10 फीट लंबा किंग कोबरा
घटना बुधवार शाम की है, जब हाथी मलखनता निवासी मुनिलाल तिवारी के घर में पास के जंगल से भटककर एक विशालकाय किंग कोबरा घुस गया।
घर के भीतर से अचानक सांप की तेज फुंफकार सुनाई देने लगी, जिससे पूरे परिवार में हड़कंप मच गया और लोग डर के मारे बाहर भागने लगे। शोर-शराबा सुनकर आसपास के ग्रामीण भी इकट्ठा हो गए।
स्थिति को भांपते हुए स्थानीय लोगों ने तुरंत क्षेत्र की जानी-मानी 'स्नेक कैचर' जानकी देवी को इस बात की सूचना दी।
जानकी देवी ने मशक्कत के बाद पकड़ा
सूचना मिलते ही जानकी देवी बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गईं। घर के कोने में बैठे खतरनाक किंग कोबरा को देखकर भी वह विचलित नहीं हुईं और काफी सूझबूझ व कड़ी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित पकड़ लिया। सांप को काबू में करने के बाद इसकी जानकारी वन विभाग की टीम को भी दे दी गई थी।
ढीली हुई पकड़ और हुआ हादसा
हादसा उस वक्त हुआ जब जानकी देवी किंग कोबरा को सुरक्षित स्थान पर छोड़ने के लिए छह आरडी की तरफ ले जा रही थीं। इसी दौरान अचानक हाथ से सांप की पकड़ थोड़ी ढीली हो गई।
मौका पाकर जहरीले कोबरा ने जानकी देवी को डंस लिया। सांप के काटते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजनों और ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए बिना एक पल गंवाए उन्हें तुरंत नेपाल के त्रिवेणी स्थित सर्पदंश उपचार केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।
सैकड़ों सांपों का रेस्क्यू कर चुकीं
इलाके में जानकी देवी को विषैले सांपों को पकड़ने में महारत हासिल है और लोग उन्हें बेहद सम्मान से देखते हैं। वह अब तक सैकड़ों खतरनाक और जहरीले सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर चुकी हैं।
सांप पकड़ने के इस साहसिक सफर में वह करीब चार बार सर्पदंश (सांप के काटने) का शिकार भी हो चुकी हैं, लेकिन हर बार मजबूत इच्छाशक्ति और सही समय पर मिले इलाज से स्वस्थ होकर लौटी हैं।
अब उनकी इस विरासत को उनका बेटा चंद्रमोहन कुमार भी आगे बढ़ा रहा है। चंद्रमोहन भी विषैले सांपों को पकड़ने में पूरी तरह निपुण हो चुका है और हर रेस्क्यू ऑपरेशन में अपनी मां का बढ़-चढ़कर सहयोग करता है।