पटना। बिहार में बांकीपुर उपचुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल के भीतर उभरती असंतुष्टि ने नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
उनके इस कदम को राजद के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। मृत्युंजय तिवारी लंबे समय तक मीडिया में पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। उनके इस्तीफे ने संगठन के भीतर चल रही नाराजगी की चर्चाओं को और हवा दे दी है।
पार्टी में उपेक्षा की भावना बनी इस्तीफे की वजह
सूत्रों के अनुसार, मृत्युंजय तिवारी पिछले कुछ समय से संगठन में अपनी भूमिका को लेकर असंतुष्ट थे। उन्हें लगता था कि पार्टी में उनके अनुभव और योगदान के अनुरूप सम्मान नहीं मिल रहा है।
इसी नाराजगी के चलते उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की मौजूदगी में अपना इस्तीफा सौंपा।
उनके इस कदम को राजद के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। मृत्युंजय तिवारी लंबे समय तक मीडिया में पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। उनके इस्तीफे ने संगठन के भीतर चल रही नाराजगी की चर्चाओं को और हवा दे दी है।
पार्टी में उपेक्षा की भावना बनी इस्तीफे की वजह
सूत्रों के अनुसार, मृत्युंजय तिवारी पिछले कुछ समय से संगठन में अपनी भूमिका को लेकर असंतुष्ट थे। उन्हें लगता था कि पार्टी में उनके अनुभव और योगदान के अनुरूप सम्मान नहीं मिल रहा है।
इसी नाराजगी के चलते उन्होंने पार्टी से अलग होने का फैसला लिया। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की मौजूदगी में अपना इस्तीफा सौंपा।
इस दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी कार्यालय में मौजूद थे। राजनीतिक जानकार इसे राजद के अंदर बढ़ती असहमति का संकेत मान रहे हैं।
इस्तीफे के बाद भी जनता के बीच सक्रिय रहने का दावा
इस्तीफे की पुष्टि करते हुए मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उनका जनता से जुड़ाव पहले की तरह जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि वे जीवनभर जनता की सेवा करते रहेंगे।
उनके मुताबिक, संगठन में सम्मान की कमी के कारण उन्हें यह फैसला लेना पड़ा। हालांकि उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
उनके बयान के बाद अब उनके भविष्य को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि वे आगे किसी नए विकल्प की तलाश कर सकते हैं।
उपचुनाव से पहले बदलते समीकरणों पर सबकी नजर
बांकीपुर उपचुनाव के मद्देनजर बिहार की राजनीति में लगातार नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। दल-बदल और नेताओं की नाराजगी चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है।
राजद के भीतर हो रही हलचल विपक्षी दलों के लिए भी अवसर बन सकती है। वहीं भाजपा और अन्य दल भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
आने वाले दिनों में कई और बड़े राजनीतिक फैसले सामने आ सकते हैं। फिलहाल बिहार की राजनीति में चर्चाओं और अटकलों का दौर तेज है।