उनका आरोप है कि भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) ने उनके घर पहुंचकर उन्हें अलग ले जाकर मामले को बंद करने की बात कही और उनका व्यवहार ऐसा था, जिससे उन्हें धमकी का एहसास हुआ. हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
चंदन तिवारी ने कहा कि लकी बिष्ट से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने किसी तरह की बढ़ा-चढ़ाकर बात नहीं कही, बल्कि वही बताया जो उनके अनुसार वास्तव में हुआ था. उन्होंने कहा कि वह सच को सामने लाना चाहते हैं, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके. उन्होंने कहा, “लकी भैया से मेरी बात हुई थी. मैंने उन्हें वही सच्चाई बताई जो हमारे साथ हुई. इसमें कुछ भी नया या झूठ नहीं है.”
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बिना अनुमति घर में क्यों आए?
चंदन ने आरोप लगाया कि जिस रात पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचे, उस समय परिवार के सिर्फ चार सदस्य मौजूद थे और घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं था. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर बिना अनुमति और बिना सूचना के पुलिस घर के अंदर क्यों पहुंची. उन्होंने कहा कि उस समय गांव के लोगों और मीडिया को घर के भीतर जाने की अनुमति नहीं थी, लेकिन पुलिस सीधे घर के अंदर पहुंच गई. उनके मुताबिक, “अगर किसी से मिलने आना था तो पहले परिवार से अनुमति ली जानी चाहिए थी. आखिर बिना पूछे घर में क्यों घुसे?”
SP ने कहा- यह सब बंद होना चाहिए
चंदन का आरोप है कि एसपी उन्हें घर से अलग ले गए और करीब दो से तीन मिनट तक बातचीत की. उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान उनसे कहा गया कि “यह सब बंद होना चाहिए, नहीं तो दिक्कत हो जाएगी.” चंदन ने कहा कि बातचीत का तरीका ऐसा था, जिससे उन्हें लगा कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है. उनके अनुसार, किसी ने सीधे धमकी जैसे शब्द नहीं कहे, लेकिन बात करने का अंदाज ऐसा था कि उन्हें लगा कि उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा, “उनके बात करने के तरीके से हमें समझ में आ गया कि हमें डराने की कोशिश की जा रही है.”
दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
चंदन तिवारी ने मामले की जांच और कार्रवाई की रफ्तार पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि किसी आम नागरिक पर हत्या का मुकदमा दर्ज होता है तो पुलिस तुरंत गिरफ्तारी करती है, लेकिन इस मामले में जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है, उनके खिलाफ अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई. उन्होंने कहा, “अगर किसी आम आदमी पर हत्या का केस होता है तो आधे घंटे में उसे उठा लिया जाता है. यहां पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? प्रशासन इसका जवाब दे.”
रिटायर्ड जज नहीं, वर्तमान हाईकोर्ट जज करें जांच
चंदन ने कहा कि उन्हें रिटायर्ड जज से जांच नहीं चाहिए. उन्होंने मांग की कि मामले की जांच वर्तमान में कार्यरत किसी वरिष्ठ हाईकोर्ट जज की निगरानी में कराई जाए, ताकि किसी तरह का संदेह न रहे. उन्होंने कहा कि यदि जांच ऐसे लोगों के हाथ में रहेगी जिन पर सवाल उठ रहे हैं तो निष्पक्ष परिणाम आने पर लोगों का भरोसा कम हो जाएगा.
बिहार की जनता सच जान चुकी है
चंदन ने कहा कि अब इस मामले को दबाया नहीं जा सकता. उनके मुताबिक, पूरे बिहार में लोग इस घटना को लेकर जागरूक हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “अगर कोई सोचता है कि दबाव बनाकर इस मामले को खत्म कर दिया जाएगा, तो ऐसा नहीं होगा. बिहार की जनता सच जान चुकी है. हम भी किसी दबाव में आने वाले नहीं हैं.”
SP को हटाने की मांग दोहराई
चंदन ने बताया कि लकी बिष्ट ने उनसे बातचीत के दौरान भरोसा दिलाया कि वह उनके साथ खड़े हैं और जल्द फिर भोजपुर आएंगे. उन्होंने कहा कि लकी बिष्ट ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच के लिए भोजपुर के एसपी को हटाने की मांग की है. चंदन ने कहा कि अगर जिले के पुलिस प्रमुख की भूमिका पर ही सवाल उठ रहे हैं तो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें जांच प्रक्रिया से अलग किया जाना चाहिए.
SP के मोबाइल की जांच की भी उठाई मांग
चंदन ने बताया कि न्यायिक जांच के लिए गांव पहुंचे सेवानिवृत्त न्यायाधीश के सामने भी उन्होंने एसपी के मोबाइल फोन की जांच कराने की मांग उठाई थी. उनका कहना है कि यदि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच करनी है तो संबंधित अधिकारियों के कॉल रिकॉर्ड और मोबाइल की भी जांच होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में होने वाली बड़ी कार्रवाई जिला पुलिस प्रमुख की जानकारी और आदेश के बिना संभव नहीं होती. इसलिए उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.