निलंबित ट्रैफिक पुलिसकर्मी विवेकानंद तिवारी ने दिया इस्तीफा, अब देशभर में चलाएंगे जागरूकता अभियान
विवेकानंद तिवारी, जो शहडोल यातायात पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात थे और सोशल मीडिया पर अपनी रील्स के जरिए काफी लोकप्रिय हो चुके थे, उन्होंने पुलिस विभाग से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 15 जून को अपना त्यागपत्र सौंपा। हालांकि विभाग ने अभी इस्तीफे पर अंतिम फैसला नहीं लिया है।
सोशल मीडिया रील्स के कारण हुई थी कार्रवाई
विवेकानंद तिवारी पिछले कुछ वर्षों से सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक नियम और पुलिस व्यवस्था से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे थे। उनके लाखों फॉलोअर्स हैं और वे मध्य प्रदेश के चर्चित पुलिसकर्मियों में गिने जाते रहे हैं।
लेकिन विभाग ने उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों को शासकीय सेवा नियमों के विरुद्ध मानते हुए आपत्ति जताई थी।
बिना सूचना ड्यूटी से गायब रहने पर सस्पेंड
शहडोल एसपी रामजी श्रीवास्तव ने 3 जून को उन्हें निलंबित कर दिया था। आरोप था कि वे बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित थे।
हालांकि तिवारी का कहना है कि वे मेडिकल इमरजेंसी के कारण छुट्टी पर थे और इसकी सूचना ट्रैफिक पुलिस के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में दे चुके थे। उनके अनुसार, उन्हें बिना सूचना अनुपस्थित मानना गलत है।
पत्नी की आय और कमाई के स्रोतों की भी जांच
मामला केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहा। अब शहडोल पुलिस ने उनकी पत्नी की आय की भी जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि तिवारी के सोशल मीडिया अकाउंट उनकी पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड हैं और रील्स व अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से होने वाली कमाई उनके बैंक खाते में आती है। पुलिस अब आय के सभी स्रोतों की जांच कर रही है।
फॉलोअर्स ने किया समर्थन
विवेकानंद तिवारी के निलंबन के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में अभियान शुरू हो गया। कई लोगों का कहना है कि वे गलत काम नहीं कर रहे थे, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर लोगों को जागरूक बना रहे थे।
दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला लोकप्रियता का नहीं बल्कि सेवा आचरण नियमों के पालन का है।
अब राष्ट्रीय स्तर पर करेंगे काम
इस्तीफे के बाद विवेकानंद तिवारी ने कहा कि अब वे नौकरी की सीमाओं से बाहर निकलकर देशभर में सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक जागरूकता को लेकर बड़ा अभियान चलाएंगे। उनके अनुसार, उनका उद्देश्य हमेशा लोगों को जागरूक करना रहा है और आगे भी यही मिशन जारी रहेगा।