सहरसा। सहरसा के जिलाधिकारी ने एक बार फिर जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। फेम इंडिया और एशिया पोस्ट द्वारा आयोजित ‘सर्वश्रेष्ठ जिलाधिकारी 2026’ वार्षिक सर्वेक्षण में उन्हें व्यवहारकुशल प्रशासनिक अधिकारियों की श्रेणी में शामिल किया गया है। यह सम्मान उनकी जनकेंद्रित कार्यशैली, विकासोन्मुख सोच और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण का प्रमाण माना जा रहा है।
मूल रूप से के रहने वाले दीपेश कुमार ने अपने प्रशासनिक जीवन में संवाद, सादगी और परिणाम आधारित कार्य संस्कृति को प्राथमिकता दी है। दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग में एमटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बिहार इंजीनियरिंग सेवा में कार्य किया। बाद में वर्ष 2017 बैच के आईएएस अधिकारी बने और विभिन्न प्रशासनिक पदों पर अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया।
सहरसा के जिलाधिकारी के रूप में कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने जिले की कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को नई गति दी। रेलवे ओवरब्रिज निर्माण, सहरसा-मधेपुरा और सहरसा-सुपौल सड़क परियोजनाओं की प्रगति के साथ-साथ कोसी नदी पर डेंगराही पुल निर्माण की शुरुआत को उनकी प्रमुख उपलब्धियों में गिना जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करना और आम लोगों को बेहतर आवागमन सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी विद्यालयों में साप्ताहिक मूल्यांकन परीक्षा और खेल गतिविधियों के लिए अलग समय निर्धारित करने जैसी पहल को व्यापक सराहना मिली। इन प्रयोगों के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद राज्य स्तर पर भी इन्हें अपनाया गया। वहीं, जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए वेंडिंग जोन, सिलाई केंद्र और स्वरोजगार आधारित योजनाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए जिलाधिकारी ने कायाकल्प अभियान के तहत अस्पतालों की स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष जोर दिया। इसके परिणामस्वरूप सहरसा सदर अस्पताल को राज्य स्तरीय सम्मान भी प्राप्त हुआ। साथ ही मत्स्यगंधा झील और ऐतिहासिक मंडन धाम के विकास के लिए किए गए प्रयासों को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जिससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
फेम इंडिया सर्वेक्षण में जनसंपर्क, नवाचार, जवाबदेही, संकट प्रबंधन, संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और त्वरित निर्णय क्षमता जैसे विभिन्न मानकों पर दीपेश कुमार के कार्यों की सराहना की गई। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि उन्होंने विकास और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन स्थापित करते हुए सहरसा को नई पहचान दिलाने का प्रयास किया है।
यह सम्मान केवल जिलाधिकारी दीपेश कुमार की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।