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Saturday, June 6, 2026

BIHAR:बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, अंतिम विदाई बन गई मिसाल

वैशाली में बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, अंतिम विदाई बन गई मिसाल

वैशाली। प्रखंड क्षेत्र के नया टोला गांव में मंगलवार को एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने उपस्थित लोगों की आंखें नम कर दीं। गांव निवासी 79 वर्षीय तारनी प्रसाद सिंह के निधन के बाद उनकी पांचों बेटियों ने पिता की अंतिम यात्रा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई। बेटियों ने न केवल अर्थी को कंधा दिया, बल्कि पूरे सम्मान और रीति-रिवाजों के साथ पिता को अंतिम विदाई भी दी।

बेटियों ने संभाली अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी

स्वर्गीय तारनी प्रसाद सिंह के परिवार में कोई पुत्र नहीं था। परिवार में उनकी पत्नी ललिता देवी और पांच बेटियां ही हैं। पिता के निधन के बाद परिवार गहरे शोक में डूब गया, लेकिन इस कठिन घड़ी में बेटियों ने साहस का परिचय देते हुए अंतिम संस्कार की पूरी जिम्मेदारी संभाली।

बड़ी बेटी पूनम सिंह, नीलम सिंह, माधुरी, माला और चांदनी ने मिलकर पिता की अंतिम यात्रा को सम्मानपूर्वक संपन्न कराया। इस दौरान पांचों बेटियां स्वयं आगे बढ़कर अर्थी को कंधा देती नजर आईं।

समाज को दिया सकारात्मक संदेश

आमतौर पर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी बेटों से जोड़ी जाती रही है, लेकिन वैशाली की इन बेटियों ने इस सोच को बदलने का संदेश दिया। उन्होंने साबित कर दिया कि बेटियां भी परिवार की हर जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह सक्षम हैं।

पिता की अर्थी को कंधा देकर बेटियों ने समाज के सामने समानता, जिम्मेदारी और पारिवारिक मूल्यों की एक नई मिसाल पेश की।

ग्रामीणों की आंखें हुईं नम

अंतिम यात्रा के दौरान गांव के लोग, रिश्तेदार और शुभचिंतक भावुक हो उठे। ग्रामीणों ने कहा कि जिस सम्मान और साहस के साथ बेटियों ने अपने पिता को अंतिम विदाई दी, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है।

लोगों का कहना था कि बेटियां केवल परिवार की जिम्मेदारियां ही नहीं निभातीं, बल्कि हर मुश्किल परिस्थिति में मजबूत सहारा बनकर खड़ी रहती हैं।

नाती ने दी मुखाग्नि

अंतिम संस्कार के दौरान स्वर्गीय तारनी प्रसाद सिंह के नाती ने मुखाग्नि दी। धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के अनुसार अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन मौजूद रहे।

प्रेरणा बनी वैशाली की बेटियां

स्थानीय लोगों गुड्डू सिंह, गौरी सिंह, मंटून सिंह, रवि सिंह, मुन्ना सिंह और उमेश सिंह ने कहा कि बदलते समय में बेटियां हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक दायित्वों के साथ-साथ वे पारिवारिक परंपराओं को भी पूरी निष्ठा और मजबूती से निभा रही हैं।

वैशाली की यह घटना समाज को यह संदेश देती है कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं और अवसर मिलने पर वे हर जिम्मेदारी को समान रूप से निभाने में सक्षम हैं।