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Saturday, June 13, 2026

BIHAR:मैं शराबी नहीं... डॉक्टर हूं', नशे में बोतल के साथ गिरफ्तार हुए बिहार के इस जिले के सीएचसी प्रभारी

रोहतास के शिवसागर CHC में हंगामा: औचक निरीक्षण में नशे की हालत में मिले प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, जांच शुरू

Bihar के Rohtas district जिले के शिवसागर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सिविल सर्जन डॉ. मणिराज के औचक निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुंदन कथित रूप से नशे की हालत में पाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने तत्काल जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई।
स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लेने पहुंचे थे सिविल सर्जन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिविल सर्जन डॉ. मणिराज शिवसागर सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, चिकित्सकीय व्यवस्था और मरीजों को मिल रही सुविधाओं का जायजा लेने के लिए अचानक पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उनकी नजर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर थी। इसी दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिषेक कुंदन का व्यवहार सामान्य नहीं लगा।
बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान उनकी भाषा, हाव-भाव और कार्य निष्पादन की स्थिति संदिग्ध प्रतीत हुई। इस पर सिविल सर्जन को संदेह हुआ कि वे किसी नशे के प्रभाव में हो सकते हैं।
डीएम और एसपी को दी गई तत्काल सूचना
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन ने तुरंत District Magistrate (डीएम) और Superintendent of Police (एसपी) को घटना की जानकारी दी। प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।
सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना रहा और मामले की रिपोर्ट तैयार की जाने लगी।
अस्पताल परिसर में चर्चा का माहौल
घटना की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और उनके परिजनों के बीच चर्चा का माहौल बन गया। कई लोगों ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि यदि अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी ही नशे की हालत में ड्यूटी करेंगे, तो मरीजों की सुरक्षा और उपचार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
चिकित्सीय जांच की प्रक्रिया शुरू
सूत्रों के मुताबिक, संबंधित चिकित्सक की मेडिकल जांच कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे वास्तव में नशे की हालत में थे या नहीं। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही प्रशासन अंतिम निर्णय लेगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई के संकेत
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान लापरवाही, अनुशासनहीनता या नशे जैसी गंभीर शिकायतों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही संसाधनों और चिकित्सकों की कमी है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर करती हैं।
फिलहाल पूरे मामले में जांच जारी है और सभी की नजर अब प्रशासनिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ होगा कि डॉ. अभिषेक कुंदन के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।