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Saturday, August 8, 2026

BIHAR:बेगूसराय में घायल के पैर में कार्टून लगाने पर बड़ी कार्रवाई, डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति खत्म

बेगूसराय में घायल के पैर में कार्टून लगाने पर बड़ी कार्रवाई, डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति खत्म

मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल में सड़क हादसे में घायल मरीज के पैर को स्थिर करने के लिए किया गया था गत्ते का इस्तेमाल, जांच में मानक चिकित्सा प्रक्रिया के अनुरूप नहीं मिला

बेगूसराय। अनुमंडलीय अस्पताल, मंझौल में सड़क दुर्घटना में घायल मरीज के पैर में कार्टून लगाए जाने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए अस्पताल की जांच कराई। जांच में मरीज के पैर को स्थिर रखने के लिए गत्ते का इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि हुई है।

स्वास्थ्य विभाग की जांच में बताया गया कि आपात स्थिति में घायल के पैर को स्थिर रखने के उद्देश्य से उपलब्ध संसाधन के रूप में कार्टून का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि गत्ता मानक चिकित्सीय प्रक्रिया का स्वीकार्य विकल्प नहीं है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद हुई जांच

मामले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसका संज्ञान लिया। इसके बाद 6 अगस्त को जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, बेगूसराय ने अनुमंडलीय अस्पताल, मंझौल पहुंचकर मामले की स्थल जांच की।

जांच के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक, अस्पताल प्रबंधक और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से घटना के संबंध में जानकारी ली गई। अस्पताल में उस समय उपलब्ध चिकित्सीय संसाधनों और मरीज के उपचार से संबंधित प्रक्रिया की भी जानकारी ली गई।

15 जुलाई को सड़क हादसे में घायल हुए थे कृष्ण कुमार

जांच में सामने आया कि 15 जुलाई को सड़क दुर्घटना में कृष्ण कुमार घायल हुए थे। उन्हें इलाज के लिए अनुमंडलीय अस्पताल, मंझौल लाया गया था। अस्पताल में उनका प्राथमिक उपचार किया गया और आवश्यक जांच के लिए एक्स-रे कराने की सलाह दी गई।

अस्पताल में रात के समय एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण कृष्ण कुमार को बेहतर जांच और उपचार के लिए सदर अस्पताल, बेगूसराय रेफर कर दिया गया।

Splint नहीं मिलने पर कार्टून का किया गया इस्तेमाल

जांच के दौरान अस्पताल कर्मियों ने बताया कि घटना के समय अस्पताल में पैर को स्थिर रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला Splint उपलब्ध नहीं था। आपात स्थिति में घायल के पैर को स्थिर रखने के उद्देश्य से उपलब्ध कार्टून का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इस व्यवस्था को मानक चिकित्सा प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना है। जांच में यह भी स्पष्ट किया गया कि मरीज को प्राथमिक उपचार देने के दौरान आवश्यक चिकित्सीय सामग्री उपलब्ध रहना जरूरी है।

अस्पताल प्रबंधन को व्यवस्था सुधारने के निर्देश

मामले के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक चिकित्सीय सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार करने को कहा गया है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को मानक के अनुरूप चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त

मामले में प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए रेफरल अस्पताल, मंझौल में प्रतिनियुक्त चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अभिनव प्रियदर्शी की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है।

उन्हें अपने मूल पदस्थापन अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रामपुर बसवन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मटिहानी में योगदान करने का निर्देश दिया गया है।

इसके साथ ही कर्तव्य में लापरवाही के संबंध में डॉक्टर से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। मामले की जांच रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना को भेज दिया गया है।

प्रशासन का सख्त संदेश

कार्टून से मरीज के पैर को स्थिर करने का वीडियो सामने आने के बाद उठे सवालों पर जांच पूरी होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है। हालांकि जांच में इसे आपात स्थिति में किया गया प्रयास बताया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने यह भी साफ कर दिया कि भविष्य में मरीजों के उपचार में मानक चिकित्सीय उपकरणों का इस्तेमाल सुनिश्चित करना होगा।