भोजपुर एनकाउंटर पर बड़ा सवाल: ‘सरेंडर के बाद भी मारी गोली?’ भरत तिवारी की मौत पर परिवार ने उठाए गंभीर आरोप
भोजपुर जिले में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मृतक के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भरत की मां का आरोप है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई।
परिवार के साथ-साथ गांव के कई लोग भी इस एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। विवाद को और हवा भरत तिवारी के आखिरी फेसबुक लाइव ने दी है, जिसमें वह कथित तौर पर अपनी पिस्टल पुलिस की ओर फेंककर सरेंडर करता दिखाई दे रहा है। हालांकि, पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
मृतक भरत भूषण तिवारी शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव का निवासी था। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर हथियार के साथ वीडियो पोस्ट कर पुलिस और प्रशासन को खुली चुनौती दे रहा था। एक दिन पहले जब शाहपुर थाना पुलिस उसके घर पहुंची थी, तब उसने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर पिस्टल तान दी थी। बाद में थानाध्यक्ष और उसकी मां के समझाने पर वह शांत हुआ था।
आखिरी फेसबुक लाइव बना बहस का केंद्र
बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे भरत तिवारी ने फेसबुक पर लाइव वीडियो किया। वीडियो में वह एसटीएफ जवानों से कुछ दूरी पर खड़ा दिखाई देता है और कहता है कि पुलिस ने उसकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है, इसलिए वह आत्मसमर्पण करने जा रहा है। लाइव के अंतिम क्षणों में वह अपनी पिस्टल नीचे फेंकता नजर आता है, जिसके तुरंत बाद वीडियो बंद हो जाता है।
यही वीडियो अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बन गया है—क्या भरत ने वास्तव में सरेंडर कर दिया था, या पुलिस के दावे के अनुसार वह अंतिम समय तक फायरिंग कर रहा था?
एसपी बोले—आत्मरक्षा में चलानी पड़ी गोली
भोजपुर एसपी राज ने बयान जारी कर कहा कि सुबह करीब 9 बजे सूचना मिली थी कि भरत भूषण तिवारी हाथ में पिस्टल लेकर हवाई फायरिंग कर रहा है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और भोजपुर एसटीएफ की टीम मौके पर पहुंची और उसे सरेंडर करने को कहा।
एसपी के अनुसार, युवक ने समर्पण करने के बजाय पुलिस पर रुक-रुक कर फायरिंग जारी रखी, जिससे आम लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई। पुलिस का कहना है कि बुलेटप्रूफ जैकेट पहने एसटीएफ जवान जब उसे काबू करने आगे बढ़े तो उसने उन्हें निशाना बनाकर गोली चलाई। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायर किया, जिसमें उसके पैर में गोली लगी।
घायल अवस्था में उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया, जहां बाद में पटना पीएमसीएच में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
प्रशासन का दावा—मानसिक रूप से अस्वस्थ था
पुलिस के अनुसार, भरत तिवारी पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर प्रशासन के खिलाफ लगातार भड़काऊ पोस्ट कर रहा था। एक वीडियो में उसने एसडीएम को मारने की धमकी भी दी थी। पुलिस का दावा है कि युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ था और उसके पास अवैध पिस्टल मौजूद थी।
पुलिस ने बताया कि बीते दो दिनों से उसे सुरक्षित पकड़कर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन हथियार होने के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। फिलहाल पुलिस ने उसके पास से बरामद हथियार और कारतूस जब्त कर लिए हैं और यह जांच की जा रही है कि अवैध पिस्टल उसके पास कैसे पहुंची।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह वास्तविक एनकाउंटर था या सरेंडर के बाद हुई कार्रवाई? इसका जवाब जांच रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और वायरल वीडियो के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही सामने आएगा।