सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि राज्य में स्कूल और कॉलेज के समय के दौरान कोचिंग सेंटर संचालित नहीं किए जा सकेंगे. इसका उद्देश्य छात्रों की नियमित शैक्षणिक उपस्थिति सुनिश्चित करना और समानांतर शिक्षा व्यवस्था पर नियंत्रण स्थापित करना है.
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अधिकारियों को कोचिंग संस्थानों के लिए व्यापक नीति तैयार करने का निर्देश दिया है. नई व्यवस्था के तहत कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण, छात्रों का रिकॉर्ड, कक्षाओं का समय निर्धारण और संचालन संबंधी मानकों को तय किया जाएगा.
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि कोचिंग संस्थानों के भौतिक संसाधनों की सघन जांच होगी. निबंधन की स्थिति, पार्किंग की सुविधा, शौचालय, पेयजल व्यवस्था, अग्निशमन विभाग की एनओसी (NOC) और अन्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जाएगा. नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई भी की जा सकती है.
इस बीच उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है. उन्होंने संकेत दिया कि छात्रों के हितों की रक्षा और शिक्षा क्षेत्र में व्यवस्था सुधार के लिए सरकार आवश्यक कदम उठाने जा रही है.
राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में इस फैसले को कोचिंग उद्योग के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है. नई नियमावली लागू होने के बाद बिहार में हजारों कोचिंग संस्थानों के संचालन पर सीधा असर पड़ सकता है.