मधुबनी। बेनीपट्टी सिविल कोर्ट के जूनियर जज मनीष रंजन के आदेश पर पुलिस प्रशासन और कोर्ट कमिश्नर की टीम 16 जून को बेनीपट्टी की सहला पंचायत के अधवारी गांव में जमीन पर महेंद्र यादव के पक्ष में दखन दहानी के लिए पहुंची थी।
तीन घंटे तक मापी और गतिरोध के बाद अचानक पीड़ित पक्ष के 60 वर्षीय राजेंद्र ठाकुर, जो एक सप्ताह की मोहलत मांग रहे थे, के शरीर में आग लग गई और वे घर से निकलकर बाहर की ओर छटपटाते भागे।
आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन की टीम को खदेड़ दिया। कोर्ट कमिश्नर रत्नाकर झा की जमकर पिटाई कर दी थी। झुलसे राजेंद्र ठाकुर का इलाज पटना में चल रहा था। परसो रात उनकी मौत हो गई।
शनिवार को शव को लेकर परिवार बेनीपट्टी पहुंचा। पत्नी ने विरोधी पक्ष के खिलाफ तेल छिड़कर हत्या का आरोप लगाते हुए आवेदन दिया है। इससे पहले एसपी और डीआईजी जांच के लिए वहां गए थे।
एसपी का कहना था खुद आग लगाई है जबकि डीआईजी मनोज तिवारी का कहना था कि जांच के बाद साफ होगा कि आग कैसे लगी। रविवार सुबह से गांव में तनाव है। आज राजेंद्र ठाकुर का अंतिम संस्कार किया जाएगा। पुलिस ने गांव को छावनी में बदल दिया है। बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।
वहीं, डीएसपी की जांच रिपोर्ट के आधार पर एसपी योगेंद्र कुमार ने बेनीपट्टी के अपर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह, अवर निरीक्षक नए लाल प्रसाद और अवर निरीक्षक मोहम्मद अली, अवर निरीक्षक जनार्दन ठाकुर, अवर निरीक्षक मोहनलाल पासवान, अवर निरीक्षक कमलेश राय को निलंबित कर दिया है। इन लोगों पर 16 को की कार्रवाई के दौरान लापरवाही बरती का आरोप है।