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Sunday, May 3, 2026

SPECIAL REPORT:बिहार में शराबबंदी के बीच ‘सूखे नशे’ का बढ़ता जाल, युवाओं पर सबसे ज्यादा असर

हेडलाइन:
बिहार में शराबबंदी के बीच ‘सूखे नशे’ का बढ़ता जाल, युवाओं पर सबसे ज्यादा असर

सबहेडलाइन:
शराब पर रोक के बाद गांजा, स्मैक, हेरोइन और नशीले इंजेक्शन का कारोबार तेजी से फैला; सीमा पार से सप्लाई, पुलिस के लिए बड़ी चुनौती


मुख्य खबर:

बिहार में वर्ष 2016 में लागू हुई शराबबंदी के बावजूद नशे का संकट खत्म नहीं हुआ, बल्कि अब “सूखे नशे” (साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। खासकर युवाओं में इसकी लत बढ़ रही है, जो सरकार और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

राज्य में शराब की तस्करी और अवैध निर्माण जारी है, वहीं अब गांजा, स्मैक, ब्राउन शुगर, हेरोइन, चरस और अफीम जैसे ड्रग्स का कारोबार भी बड़े पैमाने पर फैल चुका है। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा।


सीमांचल बना तस्करी का हॉटस्पॉट

भारत-नेपाल और पश्चिम बंगाल सीमा से सटे सीमांचल क्षेत्र, खासकर किशनगंज जिला, ड्रग्स तस्करी का प्रमुख केंद्र बन गया है।
जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच यहां से:

  • 404 किलो गांजा
  • 304 ग्राम ब्राउन शुगर
  • 133 ग्राम स्मैक
  • 808 ग्राम मार्फिन
    बरामद किए गए और 30 तस्करों को गिरफ्तार किया गया।

सिंडिकेट और सीमा पार से सप्लाई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ड्रग्स तस्करी में संगठित सिंडिकेट सक्रिय हैं।

  • सप्लाई मुख्यतः नेपाल और नॉर्थ ईस्ट राज्यों से होती है
  • बड़े शहरों में पहले स्टॉक डंप किया जाता है
  • फिर छोटे सप्लायर्स के जरिए पूरे राज्य में फैलाया जाता है

कैरियर को अक्सर पूरी जानकारी नहीं होती, जिससे मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।


पटना समेत कई जिलों में बड़ी बरामदगी

पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार:

  • 2023 से फरवरी 2026 तक पटना में 137 किलो से ज्यादा स्मैक, हेरोइन और ब्राउन शुगर जब्त
  • हजारों लीटर कोडीन युक्त कफ सिरप और चरस भी बरामद

ड्रोन सर्विलांस के जरिए 63 एकड़ में फैली अफीम की खेती नष्ट की गई।


युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

नशा माफिया खासकर युवाओं को टारगेट कर रहे हैं:

  • शुरुआत में मुफ्त में नशा दिया जाता है
  • बाद में लत लगाकर उन्हें तस्करी में शामिल किया जाता है
  • स्कूल-कॉलेज और कोचिंग के आसपास ड्रग्स की सप्लाई आम हो गई है

नशीले इंजेक्शन से बढ़ रहा HIV का खतरा

एड्स कंट्रोल सोसाइटी की रिपोर्ट के मुताबिक:

  • बिहार में 1.06 लाख HIV मरीज
  • इनमें से 11,836 लोग नशीली सुई के कारण संक्रमित

एक ही सिरिंज का कई लोगों द्वारा इस्तेमाल संक्रमण को तेजी से फैलाता है।


शराबबंदी पर उठ रहे सवाल

राज्य में अप्रैल 2016 से दिसंबर 2025 तक:

  • 10 लाख से अधिक मामले दर्ज
  • 16 लाख से ज्यादा गिरफ्तारियां

राजनीतिक नेताओं ने भी कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए हैं:

  • चिराग पासवान ने सुधार की जरूरत बताई
  • जीतन राम मांझी ने नीति की समीक्षा की मांग की

निष्कर्ष:

बिहार में शराबबंदी के बावजूद नशे की समस्या एक नए रूप में सामने आई है। सूखे नशे का बढ़ता नेटवर्क, सीमा पार तस्करी, युवाओं की बढ़ती लत और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे यह संकेत देते हैं कि सिर्फ शराबबंदी पर्याप्त नहीं है।

सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती है—नशे के इस बदलते स्वरूप पर प्रभावी नियंत्रण और युवाओं को इससे बचाना।