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Sunday, May 31, 2026

MADHEPURA:8 साल बाद मिला इंसाफ: 9 माह की मासूम से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद, पीड़िता को 5 लाख मुआवजा

मधेपुरा। बिहार के मधेपुरा जिले में नौ माह की मासूम बच्ची से दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में अदालत ने दोषी को कड़ी सजा सुनाई है। एडीजे-6 सह पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश अमित कुमार पांडेय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए उस पर 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। साथ ही पीड़िता को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।

यह मामला मुरलीगंज थाना क्षेत्र का है, जहां 15 मई 2018 को पड़ोस में रहने वाला 21 वर्षीय सुनील मंडल नौ माह की मासूम बच्ची को खेलने और टहलाने के बहाने अपने साथ ले गया था। आरोप है कि आरोपी बच्ची को सुनसान जगह पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

शाम करीब पांच बजे आरोपी बच्ची को वापस घर छोड़ने आया और चुपचाप वहां से निकलने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान परिजनों ने बच्ची के लगातार रोने की आवाज सुनी। जब उन्होंने बच्ची की हालत देखी तो उसके गुप्तांग से खून बह रहा था और वह दर्द से तड़प रही थी।

मासूम की हालत देखकर परिजनों के होश उड़ गए। उन्होंने भागने की कोशिश कर रहे आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण भी जुट गए और आरोपी को घेर लिया। इसके बाद घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।

परिजनों ने गंभीर रूप से घायल बच्ची को इलाज के लिए मुरलीगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी सुनील मंडल को हिरासत में ले लिया। पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। मामले की जांच के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।

पॉक्सो कोर्ट में चले मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक विजय कुमार मेहता ने पक्ष रखा। अदालत ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, चिकित्सीय रिपोर्ट, गवाहों के बयान और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया।

करीब आठ वर्ष पुराने इस मामले में शनिवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और पीड़िता को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया।

फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया, हालांकि उनका कहना है कि इतनी जघन्य घटना के लिए दोषी को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी।