सीवान: जिले के सराय थाना क्षेत्र के मटूक छपरा गांव से मानवता को झकझोर देने वाली, लेकिन इंसानियत पर भरोसा कायम रखने वाली एक मार्मिक घटना सामने आई है। यहां किसी निर्दयी ने जन्म के कुछ ही घंटों बाद एक नवजात बच्ची को झाड़ियों में छोड़ दिया। सुनसान जगह पर बेसहारा पड़ी मासूम लगातार रो रही थी।
रोने की आवाज सुन बुजुर्ग महिला ने बचाई जान
इसी दौरान उसी रास्ते से गुजर रही पापोर पंचायत के मुखिया मिंटू तिवारी की 80 वर्षीय माता ढेला तिवारी के कानों तक बच्ची के रोने की आवाज पहुंची। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका हृदय ममता से भर उठा। उन्होंने बिना देर किए झाड़ियों में जाकर नवजात बच्ची को अपनी गोद में उठा लिया और अपने घर ले आईं।
गांव वालों की मदद से अस्पताल पहुंची बच्ची
घटना की जानकारी धीरे-धीरे पूरे गांव में फैल गई। ग्रामीणों की सलाह पर तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद बच्ची को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है।
बच्ची पूरी तरह स्वस्थ, दत्तक केंद्र को दी गई सूचना
सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि बच्ची को स्थानीय मुखिया द्वारा अस्पताल लाया गया था। उसे बच्चों के वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है और फिलहाल बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है। उन्होंने कहा कि मामले की सूचना दत्तक केंद्र को भी दे दी गई है।
इंसानियत की मिसाल बनीं ढेला तिवारी
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि दुनिया में संवेदनाएं और इंसानियत अभी भी जिंदा हैं। जिस बच्ची को किसी ने जन्म देकर बेसहारा छोड़ दिया, उसे एक बुजुर्ग महिला ने अपनी ममता से नई जिंदगी दे दी। गांव में ढेला तिवारी की इस पहल की हर कोई सराहना कर रहा है।