कटिहार। जिला समाहरणालय परिसर स्थित जनता दरबार में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अपनी शिकायत के समाधान की मांग लेकर पहुंचे एक फरियादी ने एडीएम मनोज कुमार के समक्ष ही फिनाइल पी ली।
घटना के बाद वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया। सदर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद फरियादी की जान तो बच गई, लेकिन अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
अस्पताल के ड्रेसिंग रूम में उपचार के बाद फरियादी स्वयं हाथ में सलाइन की की थैली लेकर वार्ड की ओर जाता दिखाई दिया। यह दृश्य अस्पताल में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और मानवीय संवेदनाओं पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता पर सवाल
लोगों का कहना है कि गंभीर स्थिति में भर्ती मरीज को वार्ड तक सुरक्षित पहुंचाने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की होनी चाहिए। ऐसे में मरीज का खुद चिकित्सा उपकरण लेकर वार्ड तक जाना स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है। आम लोगों का सवाल है कि यदि गंभीर मरीजों को भी समुचित सहयोग नहीं मिल रहा है, तो अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी सवालों से बचते दिखे।
हालांकि ड्रेसिंग रूम में मरीज को देखने सीएस डॉ. जितेंद्र नाथ सिंह, प्रभारी डीपीएम डॉ. किसलय कुमार, डॉ. आर सुमन, डॉ. सुशांत कुमार, अस्पताल मैनेजर चंदन कुमार सिंह तक पहुंचे थे। इसके बाद ही ये दृश्य देखने को मिला है।