Kosi Live-कोशी लाइव Supaul News:25 वर्षों का आशियाना उजड़ा, रेलवे अतिक्रमण हटाओ अभियान में दर्जनों घर ध्वस्त; सैकड़ों दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट - Kosi Live-कोशी लाइव

KOSILIVE BREAKING NEWS

Wednesday, April 15, 2026

Supaul News:25 वर्षों का आशियाना उजड़ा, रेलवे अतिक्रमण हटाओ अभियान में दर्जनों घर ध्वस्त; सैकड़ों दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट

25 वर्षों का आशियाना उजड़ा, रेलवे अतिक्रमण हटाओ अभियान में दर्जनों घर ध्वस्त; सैकड़ों दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट

सुपौल: जिला मुख्यालय स्थित रेलवे की जमीन पर बुधवार को चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान ने कई परिवारों की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। सुबह से शुरू हुई कार्रवाई में रेलवे प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर करीब छह दर्जन से अधिक आवासीय घरों को ध्वस्त कर दिया। इसके साथ ही सड़क किनारे अस्थायी रूप से दुकान लगाकर जीवनयापन कर रहे सैकड़ों फुटकर दुकानदारों को भी हटाया गया।

अभियान के पहले दिन यह कार्रवाई इंजीनियरिंग कॉलेज के समीप से लेकर सार्वजनिक मेला समिति मैदान तक चलायी गई। बुलडोजर की कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। कई परिवार अपने घरों से सामान निकालते नजर आए, तो कई लोग अपनी आंखों के सामने वर्षों की मेहनत से बने आशियाने को टूटते देख बेबस खड़े रहे।

रेलवे ने कहा- जमीन खाली कराना जरूरी

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान रेलवे की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पूर्व निर्धारित योजना के तहत की जा रही है और आगे भी जारी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के लिए पहले ही नोटिस जारी किया गया था।

बेघर हुए परिवारों का दर्द छलका

कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों की पीड़ा साफ दिखाई दी। कई लोगों ने बताया कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से यहां रह रहे थे और धीरे-धीरे मेहनत कर घर बनाकर जीवन बसा लिया था। अचानक हुई इस कार्रवाई ने उनके सिर से छत छीन ली।

एक महिला ने कहा कि वर्षों से यहीं रह रहे थे, यहीं बच्चों का पालन-पोषण किया, लेकिन अब अचानक सब कुछ खत्म हो गया। समझ नहीं आ रहा कि कहां जाएं।

वहीं एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि अब उनके पास रहने के लिए कोई जगह नहीं बची है और खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हैं।

दुकानदारों पर भी टूटा संकट

इस कार्रवाई का असर केवल आवासीय परिवारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सड़क किनारे छोटे-छोटे ठेले और दुकान लगाकर गुजर-बसर करने वाले सैकड़ों फुटकर दुकानदारों की रोजी-रोटी पर भी सीधा असर पड़ा है। अब वे बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।

पुनर्वास की उठी मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर अतिक्रमण हटाना जरूरी था, तो पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए थी। बिना किसी ठोस इंतजाम के इस तरह की कार्रवाई ने कई परिवारों को सड़क पर ला खड़ा किया है।

पुलिस बल रहा तैनात

अभियान के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि, लोगों में आक्रोश और मायूसी साफ तौर पर देखी गई।

रेलवे का यह अभियान भले ही सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से चलाया गया हो, लेकिन इसके सामाजिक प्रभाव ने कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है।