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Saturday, April 25, 2026

BIHAR:घूस के नोट चूहे खा गए’... सुप्रीम कोर्ट में दलील सुन चौंकी अदालत, बिहार की महिला अफसर को मिली जमानत

‘घूस के नोट चूहे खा गए’... सुप्रीम कोर्ट में दलील सुन चौंकी अदालत, बिहार की महिला अफसर को मिली जमानत

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बिहार की एक महिला अधिकारी से जुड़े भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा तर्क सामने आया, जिसने अदालत को भी हैरान कर दिया। रिश्वत मामले में पेश किए जाने वाले 10 हजार रुपये के नोट चूहों द्वारा खा जाने की दलील दी गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति राज्य के राजस्व के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकती है।

हालांकि, अदालत ने दोषी महिला अधिकारी की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई हैरानी

मामले की सुनवाई जस्टिस जे.बी. पारडीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा—

"हमें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि नोट चूहे खा गए। हम सोचते हैं कि ऐसे मामलों में बरामद कितनी रकम इसी तरह नष्ट हो जाती होगी। यह राज्य के लिए भारी राजस्व नुकसान है।"

महिला अफसर पर 10 हजार रिश्वत लेने का आरोप

यह मामला बिहार की अरुणा कुमारी से जुड़ा है, जो चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम ऑफिसर (CDPO) के पद पर कार्यरत थीं। उन पर 10 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप है।

उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

ट्रायल कोर्ट ने किया बरी, हाईकोर्ट ने सुनाई सजा

इस मामले में पहले ट्रायल कोर्ट ने अरुणा कुमारी को बरी कर दिया था। बाद में पटना हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अलग-अलग धाराओं में 4 साल और 3 साल की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने माना था कि रिश्वत की रकम अदालत में पेश नहीं की जा सकी, क्योंकि नोट चूहों ने खा लिए थे। हालांकि, मालखाना रजिस्टर में राशि जमा होने का रिकॉर्ड मौजूद था। अदालत ने कहा था कि केवल नोट न होना केस को कमजोर नहीं करता।

सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर लगाई रोक

सुप्रीम Court ने सुनवाई के दौरान सबूतों के आधार पर अरुणा कुमारी की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

अदालत ने कहा कि मामले की विस्तृत अंतिम सुनवाई बाद में की जाएगी।

मालखाना व्यवस्था पर उठे सवाल

इस टिप्पणी के बाद न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में मालखानों में रखे जब्त सामान और नकदी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। अदालत की टिप्पणी को सरकारी व्यवस्था पर गंभीर संकेत माना जा रहा है।