**बेगूसराय, बिहार:** आज के आधुनिक युग में जहाँ शादियाँ करोड़ों के खर्च और महंगी लग्जरी गाड़ियों के प्रदर्शन का जरिया बन गई हैं, वहीं बिहार के बेगूसराय जिले में सादगी की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। यहाँ एक दूल्हा अपनी दुल्हनिया को लाने के लिए किसी महँगी कार में नहीं, बल्कि पारंपरिक **बैलगाड़ी** पर सवार होकर निकला।
लग्जरी कारों को दी मात**
बेगूसराय जिले के छौराही प्रखंड के **पुरपथार गांव** के रहने वाले चंद्रकांत यादव के पुत्र **प्रिंस यादव** की शादी 17 अप्रैल को तय थी। प्रिंस ने अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए किसी आधुनिक तामझाम के बजाय अपनी मिट्टी और परंपरा को चुना। बारात के लिए एक बैलगाड़ी को फूलों और रंगीन कागजों से बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया था। जब दूल्हा पारंपरिक वेशभूषा में बैलगाड़ी पर सवार हुआ, तो यह नजारा देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
### **विधायक बने बारात की शान**
इस बारात की सबसे खास बात यह रही कि स्थानीय विधायक **अभिषेक आनंद** भी इस सादगी से प्रभावित होकर बारात का हिस्सा बने। विधायक महोदय न केवल बाराती बने, बल्कि उन्होंने खुद दूल्हे के साथ सजी-धजी बैलगाड़ी पर बैठकर यात्रा की। उनके साथ उनके सुरक्षाकर्मी और सहयोगी भी पैदल और बैलगाड़ियों के साथ चलते नजर आए। विधायक की इस सादगी ने लोगों का दिल जीत लिया।
### **बेगूसराय से समस्तीपुर तक का सफर**
यह अनोखी बारात बेगूसराय के पुरपथार से निकलकर पड़ोसी जिले **समस्तीपुर के हसनपुर** तक गई। रास्ते में जिस किसी ने भी इस बारात को देखा, वह ठिठक कर देखने लगा। लोग अपने मोबाइल फोन में इस दुर्लभ दृश्य को कैद करने से खुद को नहीं रोक पाए। पूरे रास्ते लोग इस पहल की सराहना करते दिखे।
### **पर्यावरण संरक्षण और सादगी का संदेश**
जहाँ आज लोग दिखावे के लिए हेलीकॉप्टर तक बुक करते हैं, वहीं इस पहल के पीछे एक बड़ा उद्देश्य छिपा था। विधायक के सहयोगी महेश कुशवाहा ने बताया कि:
> "इस पहल का मुख्य उद्देश्य समाज को **इको-फ्रेंडली** विकल्पों के प्रति जागरूक करना है। हम यह संदेश देना चाहते हैं कि खुशियाँ मनाने के लिए प्रकृति को नुकसान पहुँचाना या अत्यधिक खर्च करना जरूरी नहीं है।"
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### **सोशल मीडिया पर छाई तस्वीरें**
शादी की तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। नेटिजन्स इसे "मिट्टी से जुड़ाव" और "दहेज मुक्त-दिखावा मुक्त शादी" की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहे हैं।
**निष्कर्ष:**
प्रिंस यादव की यह शादी समाज को यह सीख देती है कि आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। इस अनोखी बारात ने साबित कर दिया कि सादगी में जो आकर्षण और सम्मान है, वह महंगी गाड़ियों के शोर में नहीं।