पूर्णिया। कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन पूर्णिया की महिला थाना पुलिस ने यह भी साबित कर दिया कि इन हाथों में संवेदनशीलता और समझदारी भी होती है। दहेज विवाद में उलझा एक रिश्ता पुलिस की पहल से शादी में बदल गया, जिसकी जिले भर में चर्चा हो रही है।
सात साल का रिश्ता टूटने के कगार पर
मामला धमदाहा के सिंगड़ा पट्टी का है, जहां सात साल से चल रहा प्रेम संबंध दहेज विवाद के कारण टूटने के कगार पर पहुंच गया था। पीड़िता रानी कुमारी ने महिला थाना पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि उसके भविष्य से जुड़ा था।
थानाध्यक्ष ने निभाई अभिभावक की भूमिका
महिला थाना की थानाध्यक्ष शबाना आजमी ने इस मामले को संवेदनशीलता से लिया। उन्होंने लड़का अमित और उसके परिवार को बुलाकर काउंसलिंग की। कानून का पक्ष समझाने के साथ रिश्तों की अहमियत पर भी जोर दिया गया। घंटों चली बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी और विवाद सुलझ गया।
मंदिर में संपन्न हुई शादी
पुलिस की पहल पर दोनों परिवारों को शहर के पंचमुखी मंदिर ले जाया गया, जहां पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में अमित और रानी ने सात फेरे लिए। इस दौरान पुलिस टीम खुद इस विवाह की साक्षी बनी और सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई।
समाज को मिला सकारात्मक संदेश
इस पहल ने यह संदेश दिया कि पुलिस केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने का कार्य भी कर सकती है। शादी के बाद नवदंपति ने पुलिस अधिकारियों का आशीर्वाद लिया, जिससे भावुक माहौल बन गया।
"न्याय के साथ समाधान भी जरूरी"
थानाध्यक्ष शबाना आजमी ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल एफआईआर दर्ज करना नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाना है। उन्होंने बताया कि दोनों परिवारों को साथ लाकर एक नया जीवन शुरू होते देखना संतोषजनक है।