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Thursday, March 12, 2026

‘अब हमेशा के लिए सो जा मेरे लाल…’ 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को इच्छामृत्यु की इजाजत, मां की तस्वीर ने कर दिया सबको भावुक

हेडलाइन:
‘अब हमेशा के लिए सो जा मेरे लाल…’ 13 साल से कोमा में पड़े हरीश राणा को इच्छामृत्यु की इजाजत, मां की तस्वीर ने कर दिया सबको भावुक

स्टोरी:
इतिहास में पहली बार ने किसी व्यक्ति को इच्छामृत्यु की अनुमति देते हुए एक भावुक और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा, जो पिछले 13 साल से कोमा जैसी स्थिति में हैं, को पैसिव इच्छामृत्यु (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति दे दी है। कोर्ट का यह फैसला सामने आते ही यह खबर आग की तरह फैल गई और लोग सोशल मीडिया पर हरीश राणा के बारे में जानने लगे।

इस बीच हरीश की मां की एक तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों को गहराई तक भावुक कर दिया है। तस्वीर में मां अपने बेटे के सिरहाने बैठी हुई हैं, आंखों में आंसू और चेहरे पर वर्षों की पीड़ा साफ झलक रही है। वह बेटे के सिर पर हाथ फेरते हुए जैसे खामोशी से कह रही हों—“जा बेटा, अब तू सुकून से सो जा।” यह तस्वीर एक मां के दिल में छिपे उस दर्द को बयान कर रही है, जो पिछले 13 साल से बेटे को इस हालत में देख रही थी।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

बुधवार को जस्टिस और जस्टिस की पीठ ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए (AIIMS) को निर्देश दिया कि हरीश राणा को भर्ती कर चरणबद्ध तरीके से लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाए, ताकि उन्हें गरिमापूर्ण मृत्यु मिल सके।

कैसे हुई थी हरीश की यह हालत

हरीश राणा में बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। साल 2013 में यूनिवर्सिटी के पास स्थित अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं। सिर में गंभीर चोट लगने से वह 100 प्रतिशत क्वाड्रिप्लेजिया (चारों अंगों का लकवा) से ग्रसित हो गए।

पिछले 13 साल से वह स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में हैं और सांस लेने के लिए ट्रेकियोस्टॉमी ट्यूब तथा खाने के लिए गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी ट्यूब पर निर्भर हैं। डॉक्टरों के अनुसार लंबे इलाज के बाद भी उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और वे पूरी तरह से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर ही जीवित हैं।

माता-पिता ने लिया सबसे कठिन फैसला

की मेडिकल रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि हरीश के ठीक होने की कोई संभावना नहीं बची है। इसके बाद मां निर्मला राणा और पिता अशोक राणा ने ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर बेटे के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी थी।

परिवार ने पिछले 13 साल यानी करीब 4586 दिनों तक बेटे की सेवा में सब कुछ झोंक दिया। मां ने दिन-रात उसकी देखभाल की और हर पल उम्मीद की कि बेटा एक दिन आंखें खोलेगा। लेकिन जब उम्मीदें टूटती चली गईं और बेटे की पीड़ा असहनीय होती गई, तब माता-पिता ने भारी मन से यह कठिन फैसला लिया।

अब हटाया जाएगा लाइफ सपोर्ट

कोर्ट के फैसले के बाद अब डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे हरीश के शरीर से लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाया जाएगा। परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक है। एक तरफ मां की ममता बेटे को रोकना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ उसकी पीड़ा देखकर वह खुद को समझा रही हैं कि शायद यही उसके लिए सबसे बड़ी मुक्ति है।