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सहरसा में बनेगी बर्फ फैक्ट्री, कोसी की मछली अब आसान पैकिंग के साथ दूसरे राज्यों तक पहुंचेगी
सहरसा। कोसी प्रभावित सहरसा जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य विभाग लगातार नई योजनाओं पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में अब मछली उत्पादन को बढ़ाकर उसे दूसरे प्रदेशों तक सुरक्षित पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है। मछली की पैकिंग में होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए प्रथम चरण में कहरा प्रखंड में एक बर्फ फैक्ट्री की स्थापना की जा रही है।
इस बर्फ फैक्ट्री से मत्स्यपालकों और मछली विक्रेताओं को निर्धारित कीमत पर बर्फ उपलब्ध कराई जाएगी। करीब 40 लाख रुपये की लागत से स्थापित होने वाले इस 10 एमटी क्षमता के प्लांट पर विभाग की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में एक प्लांट लगाया जाएगा, जबकि आने वाले वर्षों में इसकी संख्या बढ़ाने की योजना है।
कोसी की देसी मछलियों की देशभर में मांग
कोसी प्रमंडल के सहरसा, मधेपुरा और सुपौल जिलों में रेहू, कतला, सिल्वर कार्प, कॉमन कार्प समेत कई प्रकार की देसी मछलियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। मत्स्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रमंडल में प्रतिवर्ष 35 से 40 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हो रहा है।
यहां की स्वादिष्ट बुआरी और भौरा मछली की मांग पंजाब के अमृतसर, जालंधर और लुधियाना में है। वहीं पश्चिम बंगाल के कोलकाता और सिलीगुड़ी में कोसी क्षेत्र की बामी मछली काफी पसंद की जाती है। इसके अलावा सिंघी मछली असम प्रांत तक भेजी जाती है, जिससे मत्स्यपालकों को अच्छी कीमत मिलती है।
मत्स्यपालकों की बढ़ेगी आमदनी
आने वाले दिनों में देसी मछलियों का उत्पादन और बढ़ने की उम्मीद है। इससे जहां क्षेत्र मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, वहीं दूसरे राज्यों में आपूर्ति बढ़ने से मत्स्यपालकों की आमदनी में भी इजाफा होगा।
जिला मत्स्य पदाधिकारी जयप्रकाश सिंह ने बताया कि जिले में मछली उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। मछली को बाहर भेजने के लिए बर्फ की समस्या न हो, इसी को ध्यान में रखते हुए प्लांट लगाने का निर्णय लिया गया है। यहां से सिर्फ मछली विक्रेताओं को ही बर्फ उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। आने वाले समय में ऐसे प्लांटों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।