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Thursday, February 5, 2026

बिहार के किसानों के लिए खुशखबरी--बाप-दादा के नाम जमीन? चिंता खत्म... वंशावली से बनेगी फार्मर ID

Bihar Bhumi: बिहार के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. अब अगर किसी किसान की जमीन उसके नाम पर नहीं, बल्कि बाप-दादा या पूर्वजों के नाम पर दर्ज है, तो भी उसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिल सकेगा. सरकार ने वंशावली के आधार पर फार्मर आईडी बनाने की अनुमति दे दी है, जिससे हजारों किसानों की अटकी हुई समस्या दूर होने की उम्मीद है.

अब तक फार्मर आईडी बनाने में सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि जमीन का खतियान सीधे किसान के नाम पर नहीं होने पर आवेदन रिजेक्ट हो जा रहा था. ऐसे में बड़ी संख्या में किसान पीएम किसान योजना से बाहर रह जाते थे. लेकिन अब नियमों में बदलाव के बाद पिता, दादा या पूर्वजों के नाम की जमाबंदी होने पर भी किसान का रजिस्ट्रेशन संभव हो गया है.

एक दिन में बन रहा हजारों किसानों की फार्मर आईडी

कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, वंशावली के आधार पर फार्मर रजिस्ट्री शुरू होते ही रजिस्ट्रेशन की रफ्तार तेज हो गई है. कई जिलों में एक दिन में हजारों किसानों की फार्मर आईडी बनाई गई. संयुक्त जमाबंदी की स्थिति में भी अलग-अलग परिवार के सदस्यों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों में राहत की उम्मीद बढ़ी है.

रजिस्ट्रेशन के दौरान सभी दस्तावेजों की हो रही जांच

हालांकि, अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि वंशावली के आधार पर रजिस्ट्रेशन के दौरान सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है. गलत या फर्जी फार्मर आईडी बनने की शिकायत मिलने पर सॉफ्टवेयर में फिर से सख्ती की जा रही है. नाम और जमाबंदी में ज्यादा अंतर होने पर आवेदन स्वीकार नहीं किया जा रहा है.

पहले से ई-केवाईसी वालों को फायदा

कृषि विभाग के मुताबिक, जिन किसानों की ई-केवाईसी पहले से पूरी है, उन्हें अब फार्मर आईडी बनवाने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी. गांव स्तर पर कैंप लगाकर किसानों की मदद की जा रही है. किसान सलाहकार और कृषि कर्मी घर-घर जाकर किसानों को जरूरी जानकारी दे रहे हैं.

प्रशासन की ओर से कहा गया है कि सभी पात्र किसानों की फार्मर आईडी जल्द से जल्द तैयार की जाएगी, ताकि किसी भी किसान का पीएम किसान योजना का लाभ न रुके. वंशावली के आधार पर रजिस्ट्रेशन की सुविधा से उन किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. जिनकी जमीन पीढ़ियों से परिवार के नाम पर चली आ रही है, लेकिन अभी तक नामांतरण नहीं हो सका था.