बिहार में जमीन से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है. विधानसभा के प्रश्नकाल में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने ऐलान किया कि जिन जमीनों का अब तक सर्वे नहीं हुआ है, उनके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा.
सरकार ने दो वर्षों में सर्वे का काम पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, ताकि लाखों किसानों और जमीन मालिकों को राहत मिल सके.
20% भूमि अब भी बिन सर्वे के
विधानसभा में सदस्य मंजीत कुमार सिंह ने सवाल उठाया कि राज्य की लगभग 20 फीसदी भूमि का अब तक सर्वेक्षण नहीं हुआ है. इसके कारण न तो जमाबंदी तय हो पा रही है और न ही लगान निर्धारण. मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्वीकार किया कि चिंता जायज है और बिना सर्वे की जमीन के कारण कई किसान अनुदान और सरकारी योजनाओं से वंचित हैं. जमीन की खरीद-बिक्री में भी दिक्कतें आ रही हैं.
मंत्री ने बताया कि सर्वे का कार्य 2012 में शुरू हुआ था, 2015 में समीक्षा और 2019 में बदलाव किए गए. अब सरकार ने इसे मिशन मोड में लेते हुए दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशेष अभियान चलाया जाएगा ताकि लंबित मामलों का जल्द समाधान हो.
जमीन जमीर को प्रभावित करती है
मंत्री विजय सिन्हा ने विधान परिषद में ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ कार्यक्रम की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि जमीन के विवाद न केवल विकास रोकते हैं, बल्कि समाज में लहू भी बहाते हैं. उन्होंने इसे ‘जमीन की बीमारी’ करार दिया और कहा कि जनसंवाद के माध्यम से इस बीमारी की पहचान कर उसका मानवीय और पारदर्शी समाधान निकाला जा रहा है.
अब तक प्राप्त 8363 शिकायतों में से 2414 का समाधान त्वरित गति से किया जा चुका है. खास बात यह है कि इस पहल की सराहना सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के सदस्यों ने भी की है.
40 लाख परिमार्जन आवेदन लंबित
राजस्व महा-अभियान के दौरान 46 लाख आवेदन मिले, जिनमें करीब 40 लाख आवेदन परिमार्जन से जुड़े हैं. ये मामले नाम, खाता और खेसरा संशोधन से संबंधित हैं. सरकार ने इन आवेदनों के प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन का लक्ष्य तय किया है, ताकि जमीन मालिकों को योजनाओं का लाभ मिल सके.
भूमि सुधार जनकल्याण संवाद से समाधान
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जटिल भूमि विवादों के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए 'भूमि सुधार जनकल्याण संवाद' कार्यक्रम चलाया जा रहा है. अंचलवार रजिस्ट्रेशन काउंटर खोलकर शिकायतों की सुनवाई की जा रही है. अब तक 8363 मामलों में से 2414 का समाधान किया जा चुका है.
विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जमीन की समस्या सिर्फ प्रशासनिक नहीं, सामाजिक भी है. भूमि विवादों के कारण राज्य में कई बार हिंसा हुई है. सरकार का प्रयास है कि विवाद कम हों और विकास की प्रक्रिया बाधित न हो. विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में इस पहल की सराहना भी की गई.