विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि तीन दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.
अफसरों से जवाब तलब
जिला परिवहन पदाधिकारी स्तर पर भागलपुर, छपरा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पटना, सीतामढ़ी, किशनगंज, अरवल, रोहतास और समस्तीपुर के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. इन पर निर्धारित राजस्व लक्ष्य पूरा न करने और कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप है. परिवहन विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वित्तीय अनुशासन से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और प्रदर्शन के आधार पर ही जवाबदेही तय होगी.
विभाग ने अधिकारियों से यह भी पूछा है कि जब वे तय लक्ष्य हासिल करने में विफल रहे, तो किन कारणों से उन्हें पद पर बनाए रखा जाए. नोटिस मिलने के बाद संबंधित जिलों के अधिकारियों पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है और विभागीय कार्रवाई की आशंका से महकमे में हलचल तेज हो गई है.
ADTO, MVI और ESI भी जांच के घेरे में
कार्रवाई का दायरा सिर्फ डीटीओ तक सीमित नहीं है. परिवहन विभाग ने अब उन जमीनी अधिकारियों पर भी शिकंजा कस दिया है जिनकी जिम्मेदारी सड़कों पर जांच अभियान चलाने और जुर्माना वसूलने की होती है.
मुजफ्फरपुर, गया और बेतिया जैसे जिलों में तैनात मोटर वाहन निरीक्षकों (MVI) से भी जवाब मांगा गया है.प्रवर्तन अवर निरीक्षकों (ESI) पर भी विभाग की नजर टेढ़ी हुई है. विभाग का मानना है कि इन अधिकारियों ने फील्ड में सक्रियता नहीं दिखाई और प्रवर्तन कार्यों में गंभीर लापरवाही बरती.मधेपुरा, लखीसराय, सुपौल और बक्सर के अधिकारियों से भी पूछा गया है कि आखिर राजस्व वसूली की गाड़ी 'न्यूट्रल गियर' में क्यों चल रही है?
तीन दिन की डेडलाइन
परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि वह अब ‘बहानेबाजी’ सुनने के मूड में नहीं है. सभी 40 अधिकारियों को महज तीन दिनों का समय दिया गया है. यदि जवाब में ठोस वजह नहीं बताई गई, तो इन अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी.
अधिकारियों के प्रमोशन से लेकर इंक्रीमेंट तक पर रोक लग सकती है और भविष्य में उनकी पोस्टिंग पर भी काले बादल मंडरा सकते हैं.