Bihar News : बिहार सरकार ने किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों पर सरकार की कार्रवाई तेज हो गई है. किसानों के हक पर डाका डालने वाले खाद माफियाओं के खिलाफ सरकार ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना ली है.कृषि विभाग ने 37 दुकानदारों पर एफआईआर दर्ज कर खाद की कालाबाजारी करने वालों की कमर तोड़ दी है.
खाद माफियाओं पर कृषि मंत्री का बड़ा एक्शन
खेती-किसानी के मोर्चे पर कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. राज्य में खाद की कोई कमी नहीं है, फिर भी कृत्रिम किल्लत पैदा करने वाले 37 दुकानदारों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. विभागीय कार्रवाई इतनी सख्त है कि अब तक 100 दुकानदारों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं और 132 को निलंबित कर दिया गया है.
कृषि विभाग ने मुख्यालय स्तर पर उड़नदस्ता दल का गठन किया है जो रबी सीजन 2025-26 के दौरान निरंतर छापेमारी कर रहा है. विभाग का कहना है कि वर्तमान में राज्य के पास यूरिया, डीएपी और एनपीके का पर्याप्त स्टॉक है, जो किसानों की आगामी जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है.
बॉर्डर पर तस्करी रोकने के लिए कड़े इंतजाम
खाद की कालाबाजारी के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर इसकी तस्करी एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी. इसे देखते हुए नेपाल से सटे पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. सशस्त्र सीमा बल (SSB) के साथ मिलकर चलाए गए अभियानों में तस्करी के चार बड़े मामले पकड़े गए हैं.
कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हो रही गतिविधियों पर उनकी पैनी नजर है. शिकायत मिलने पर न केवल दुकानदारों बल्कि लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई और स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है. व्हाट्सएप और हेल्पलाइन के जरिए मिल रही शिकायतों पर पटना, शेखपुरा और सुपौल जैसे जिलों में तत्काल कार्रवाई की गई है.
किसानों के लिए ई-केवाईसी और रजिस्ट्रेशन का विशेष अभियान
खेती को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए राज्य में ‘फार्मर रजिस्ट्रेशन’ का विशेष अभियान भी जोरों पर है. अब तक 6.30 लाख किसानों की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों में पहुंच सकेगा.
पटना जिले की 322 पंचायतों में विशेष कैंप लगाकर कृषि समन्वयक और किसान सलाहकार किसानों की मदद कर रहे हैं. 9 जनवरी तक चलने वाले इस विशेष अभियान का उद्देश्य हर पात्र किसान को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से जोड़ना है. राज्य सरकार की इस सक्रियता से उम्मीद है कि आने वाले समय में बिहार का किसान और अधिक सशक्त होगा.