बिहार सरकार ने राज्य के आम नागरिकों को उनकी पुश्तैनी जमीन पर कानूनी अधिकार दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 16 अगस्त 2025 से शुरू हुए राजस्व महा-अभियान के तहत पूरे राज्य में पंचायत स्तर पर भूमि सुधार के लिए विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं।
इस अभियान का उद्देश्य है कि जो लोग आज भी अपने पूर्वजों की जमीन पर खेती कर रहे हैं, लेकिन उनके नाम जमीन दर्ज नहीं है, उन्हें उनका अधिकार दिलाया जाए।
क्या है राजस्व महा-अभियान?
यह एक विशेष मुहिम है जिसे बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाया जा रहा है। इसके तहत राज्य के हर पंचायत में शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां ग्रामीण अपने पुश्तैनी जमीन से संबंधित कागजातों में सुधार करा सकते हैं। इसमें मुख्य रूप से सक्सेशन (उत्ताधिकारी प्रक्रिया), परिमार्जन (कागजी सुधार), और बंटवारा (पार्टिशन) जैसे मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है।
क्यों है यह अभियान जरूरी?
बिहार में बड़ी संख्या में लोग आज भी अपने दादा या परदादा के नाम पर दर्ज जमीन पर खेती कर रहे हैं, लेकिन वह जमीन उनके नाम पर दर्ज नहीं है। इसके चलते वे कानूनी रूप से मालिक नहीं माने जाते और कई बार जमीन को लेकर पारिवारिक विवाद भी खड़े हो जाते हैं। इस महा-अभियान के ज़रिए अब लोगों को अपनी पुश्तैनी ज़मीन को अपने नाम करवाने का सीधा और सरल रास्ता मिल गया है।
कौन कर सकता है आवेदन?
जो भी व्यक्ति अपने पूर्वजों की जमीन पर वर्षों से काबिज हैं और उसके दस्तावेज़ आज भी पुरानी पीढ़ी के नाम पर दर्ज हैं, वे इस अभियान में आवेदन कर सकते हैं। यह अभियान एक अवधि आधारित कार्यक्रम है, यानी इसमें सुधार कराने का सीमित समय है। इसलिए सरकार ने साफ किया है कि यदि आपने समय रहते अपनी ज़मीन का कागज दुरुस्त नहीं कराया, तो आगे मुश्किलें आ सकती हैं।