यह नरभक्षण का दुर्लभतम श्रेणी का केस है। बंबई हाई कोर्ट ने कहा कि दोषी ने सिर्फ मां की हत्या ही नहीं की। बल्कि शरीर के अंग भी निकाल लिए। दोषी अंगों को पका रहा था। मां की पसलियां पका ली थीं, जबकि ह्रदय पकाने वाला था। सीधे तौर पर बेटा नरभक्षी बन गया था। अगर उसे उम्रकैद की सजा दी गई तो वह जेल में भी इस तरह का अपराध कर सकता है।
कुचकोरवी को वीसी के जरिए कोर्ट के फैसले की जानकारी दी गई। अभियोजन पक्ष के मुताबिक दोषी ने 28 अगस्त 2017 को कोल्हापुर शहर में घर में वारदात को अंजाम दिया था। सुनील ने मां यल्लामा रमा कुचकोरवी (63 वर्षीय) को बेरहमी से मार डाला था। इसके बाद आरोपी ने बॉडी के टुकड़े किए और कढ़ाई में पकाकर खा गया। दोषी अपनी मां से शराब के लिए पैसे मांग रहा था। मना करने पर वह गुस्से में आ गया।
2021 में कोर्ट ने दी थी मौत की सजा
इससे पहले 2021 में कोल्हापुर की अदालत ने सुनील कुचकोरवी को मौत की सजा सुनाई थी। दोषी इस समय पुणे की यरवदा जेल में बंद है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जघन्य हत्या ने सामाजिक चेतना को झकझोर कर रख दिया है। दोषी ने कोल्हापुर कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
