वैसे डीजीपी की रेस में कई अधिकारी शामिल थे. विनय कुमार और शोभा अहोतकर का नाम सबसे आगे चल रहा था.लेकिन सरकार ने योग्यता के साथ साथ वरीयता का ध्यान रखते हुए 1989 बैच के आलोक राज के हाथ में बिहार पुलिस की कमान देने का फैसला ले लिया है.
वह फिलहाल निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीजी हैं और पिछली बार भी रेस में थे. पिछली बार केंद्र से आने वाले तीन अफसरों की सूची में वह दूसरे नंबर पर थे. पहले नंबर पर मनमोहन थे, जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं. लेकिन बाजी मार ली थी आर.एस भट्टी ने.लेकिन भट्टी के केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की वजह से आलोक राज को ये बड़ा मौका मिल गया है.आलोक राज एक सुलझे हुए पुलिस अधिकारी माने जाते हैं.बतौर एसपी- डीआइजी और आईजी वो जहाँ पर भी रहे अपनी छाप छोड़ते रहे. अपने नौकरी के आखिरी शानदार पारी खेलने का उन्हें मौका मिल गया है.
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