छठ पूजा काफी धूमधाम से मनाई गई l
रिपोर्ट :- रामपुकार कुमार
लोक आस्था का महापर्व छठ भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही सोमवार को संपन्न हो गया। सोमवार को चौथा और अंतिम दिन था। सुबह करीब छ बजकर 16 मिनट पर सूर्योदय होने के साथ ही अर्घ्यदान का क्रम आरंभ हो गया था। इसके बाद व्रती व उनके स्वजनों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर खुद के लिए और समाज व देश के हित की कामना की। इससे पहले अल सुबह से ही श्रद्धालु पास के छठ घाटों पर पहुंच गए थे। इन घाटों पर रोशनी की व्यवस्था नहीं रहने की वजह से व्रती महिलाओं को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा l और श्रद्धालुओं के लिए पंडाल की व्यवस्था नहीं की गयी थी। घैलाढ़ प्रखंड क्षेत्र के भतरंधा परमानपुर वार्ड नंबर 15 में इस साल छठ घाट पर अपेक्षाकृत श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ देखी गयी । छठ में प्रात:कालीन अर्घ्य का विशेष महत्व है। यह प्रत्यक्ष देवों में एक भगवान भास्कर को अर्पित किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि पूरी आस्था के साथ अर्घ्य अर्पित करने वालों पर भगवान सूर्य की विशेष कृपा होती है। वे उसे अपने जैसा तेज प्रदान करते हैं। रोगों को हर लेते हैं। परिवार में सुख व शांति प्रदान करते हैं। यह ऊर्जा प्रदायक है। रोगनाशक है। परंपरा है कि व्रती सूर्योदय के बाद अपने साथ ही साथ स्वजनों से भी अर्घ्यदान कराती हैं। तांबे के पात्र में जल, एक चुटकी रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत व लाल पुष्प डालकर गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देने से सरकारी पद, स्वास्थ्य, धन व सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक प्रकाश रंजन ने बताया कि छठ को लेकर घाट की साफ-सफाई की गयी थी। लिहाजा व्रतियों को किसी प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा। आपको बता दे की लोक आस्था का महापर्व छठ ग्रामीण व शहरी इलाकों मे हर्षोल्लास पूर्वक संपन्न हुआ। व्रती महिला 48 घंटे तक जल व अन्न ग्रहण किये बिना पूरे आस्था के साथ छठ पर्व मनाए हैं। चार दिवसीय महापर्व शुक्रवार को नहाखाय से प्रारंभ हुआ। इसके बाद शनिवार को खरना पूजा हुआ। पूरे विधि विधान व नियम पूर्वक रविवार को पहला अर्घ्य भगवान भास्कर को दिया गया। सोमवार को उदयमान भास्कर को अर्घ्य देकर महापर्व संपन्न हुआ। छठ पूजा काफी उत्साह व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रो मे लोक आस्था का महापर्व चैती छठ मनाया गया।
