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Wednesday, November 22, 2023

Madhepura DM की कार से कैसे हुआ हादसा; कौन कर रहा था ड्राइव, इस तरह आसानी से हो सकता है खुलासा


सूत्र, फुलपरास। Madhepura DM Car Accident । मधुबनी के फुलपरास थाना क्षेत्र में डीएम विजय प्रकाश मीणा की गाड़ी ने एनएच 57 पर फुलपरास पुरवारी टोला के समीप मंगलवार सुबह मां-बेटी सहित चार को कुचल दिया था जिसमे तीन लोगों की मौत हो गई थी।

डीएम विजय प्रकाश मीणा की गाड़ी से कुचलकर मरने वाले तीन लोग गरीब घर के हैं। यही कारण है कि उनकी मौत को मामूली मानकर पुलिस प्रशासन इस मामले को दबाने में लगा हुआ है।

अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया गया मामला

दुर्घटना के समय डीएम और उनके चालक के मोबाइल फोन की लोकेशन कहां थी? न तो इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है और ना ही यह बताया जा रहा है कि आखिर उनकी गाड़ी यहां क्या करने आई थी?

अज्ञात चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जा रहा है। गरीब की मौत की जगह अगर किसी रसूखदार की मौत हुई होती, तो शायद प्रशासन ऐसा नहीं कर पाता।

ऐसे खुल सकता है पूरा मामला

रहिका सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष ब्रह्मानंद यादव का कहना है कि डीएम के निजी एवं सरकारी मोबाइल फोन की लोकेशन के साथ मनीगाछी टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज की जांच करने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। डीएम साहब कहां थे? गाड़ी कौन ड्राइव कर रहा था? इसका आसानी से पता लगाया जा सकता है।

बच्चों की मदद करें डीएम मधेपुरा

उन्होंने कहा कि प्रशासन मामले की लीपापोती कर रहा है। उन्होंने कहा कि मानवता के नाते मधेपुरा डीएम को सामने आकर मृतका के पांचों अबोध बच्चों की मदद करनी चाहिए।

एसडीओ अभिषेक कुमार ने कहा कि पीड़ित स्वजन को जल्द ही पारिवारिक लाभ का चेक दिया जाएगा। अभिलेख तैयार कर मां-बेटी के स्वजन एवं मजदूर अशोक सिंह के स्वजन को भी अन्य लाभ भी जल्द दिया जाएगा।

नहीं हो सका अंतिम संस्कार

फुलपरास के पुरवारी टोला निवासी रंजीत साह पंजाब में रहकर मजदूरी करते हैं। इससे पत्नी गुड़िया देवी के अलावा, छह बच्चों (उम्र तीन से 12 वर्ष) का भरण-पोषण होता है।

पत्नी और बेटी आरती (4) की मौत की सूचना मिलते ही वह घर के लिए चल दिए, लेकिन बुधवार देर शाम तक पहुंच नहीं सके। उनके देर रात पहुंचेंगे की बात कही जा रही। यही कारण है कि अभी उनकी पत्नी और बेटी का अंतिम संस्कार नहीं हो सका है।

अंतिम संस्कार के लिए सरकारी मदद के नाम पर मुख्य पार्षद धर्मेंद्र साह की ओर से कबीर अंत्येष्टि की राशि छह हजार रुपये स्वजन को दी गई है। दूसरी ओर, जिस मजदूर की मौत हुई है, उसका परिवार भी गरीब है।