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Friday, October 6, 2023

सुपौल में मनरेगा में अवैध वसूली: ग्रामीणों ने बताया- पशु शेड निर्माण से पहले 5 लाभुकों से ढाई लाख लिए

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सुपौल में मनरेगा में अवैध वसूली:ग्रामीणों ने बताया- पशु शेड निर्माण से पहले 5 लाभुकों से ढाई लाख लिए


तो बना दिया लेकिन अब मांग रहे 35 हजार रुपए।

सुपौल के छातापुर में मनरेगा के क्रियान्वयन में अवैध उगाही का मामला सामने आया है। यहां पशु शेड निर्माण के लिए प्रत्येक लाभुकों से पहले 50 हजार रुपए जमा ले लिया गया। अब प्रत्येक लाभुक से 35 हजार रुपए की दर से अतिरिक्त राशि की मांग की जा रही है।
इनके नाम मिली थी राशि।

बताया जा रहा है कि छातापुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत राजेश्वरी पूर्वी पंचायत के वार्ड 7 में वित्तीय साल 2020-21 के दौरान दो परिवारों के पांच लोगों का नाम पशु शेड निर्माण के लिए सूची में आया था। राजेश्वरी पूर्वी पंचायत के वार्ड सात तमुआ गांव निवासी राजो देवी ने बताया कि योजना में उसकी तीन बहू लालो देवी, पुष्पा देवी और खुशबु देवी का नाम सूची में था।
ग्रामीणों में रोष।

जबकि पड़ोस की चंद्रकला देवी और उसकी बहू लाखो देवी भी लाभुक की सूची में शामिल थी। सूची में नाम आने के बाद सभी लाभुकों को तमुआ बाजार स्थित वेंडर हर्ष ट्रेडर्स के प्रोपराइटर ललन भगत ने संपर्क साधा। पशु शेड निर्माण के लिए मैटेरियल सप्लाई को लेकर 50 हजार रुपए प्रति लाभुक की दर अग्रिम राशि जमा करने को कहा।

लाभुकों की माने तो उस वक्त वेंडर ने सरकारी अनुदान की राशि मिलने पर जमा किए गए रुपए वापस करने का भरोसा दिलाया था। राशि जमा करने के बाद वेंडर ने कुछ मैटेरियल सप्लाई किया। शेड बन कर भी तैयार हो गया। लेकिन इसके बाद जब लाभुक वेंडर के पास रुपए वापसी के लिए पहुंचे तो बार-बार हिसाब का हवाला देते हुए टालमटोल किया जाता रहा।
अब लाभुकों से उल्टा मांग रहे पैसा।

लाभुकों ने बताया कि करीब 6 माह पहले स्थानीय वार्ड सदस्य द्वारा योजना राशि के भुगतान की जानकारी मिली। लेकिन जब वेंडर से फिर से अग्रिम के तौर पर लिए गए रुपए वापस की मांग की गई तो वह उल्टा 35 हजार रुपए प्रति लाभुक की दर से अतिरिक्त राशि के डिमांड करने लगा। बहरहाल, वेंडर की मनमानी को लेकर लाभुकों ने छातापुर प्रखंड के मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी से शिकायत की है। जमा की गई अग्रिम राशि के वापसी की मांग की है।

इधर, मनरेगा पीओ कौशल कुमार राय ने बताया कि अवैध उगाही करने का मामला संज्ञान में आया है। शिकायत की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि वित्तीय साल 2020-21 में लाभुकों को प्रत्येक पशु शेड पर एक लाख 80 हजार 895 रुपए की दर अनुदान का भुगतान होना था। इसमें मजदूरी के लिए 13 हजार 774 रुपए और शेष राशि मैटेरियल के लिए निर्धारित था।

लेकिन लाभुकों का आरोप है कि वेंडर द्वारा शेड के लिए सभी सामान उपलब्ध नहीं कराए गए। बल्कि टीन शेड तक उन्होंने खुद के पैसों से ही खरीदा। बावजूद वेंडर द्वारा मैटेरियल की पूरी राशि का उठाव कर लिया गया है। हालांकि वेंडर ललन भगत ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।