बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दावों की पोल पश्चिम चंपारण में उस समय खुल गई जब एक नवप्रसूता को एक अदद एम्बुलेंस बच्चे के साथ घर जाने के लिए नहीं मिला। सोमवार की शाम पीएचसी में एम्बुलेंस नही मिलने के कारण प्रसव के बाद नवजात शिशु और प्रसव पीड़ित महिला को पैदल घर जाना पड़ा। एम्बुलेंस तो अस्पताल परिसर में खड़ा रहा लेकिन मरीजो को इसका लाभ नही मिल रहा है।
भितहा प्रखंड के बलुआडवा गहई टोला की प्रसव की मरीज लक्ष्मीना देवी सोमवार की सुबह अस्पताल में भर्ती हुई जहां उसका सही सलामत प्रसव कराया गया। सुबह से भर्ती मरीज को जब दोपहर में परिजन अस्पताल से घर जाने लगे। दो घंटे के बच्चे ओर उसकी नवप्रसूता मां को ले जाने के लिए परिजनों ने एम्बुलेंस की मांग की। इस पर परिजनों से अस्पताल कर्मियों ने बताया कि एम्बुलेंस में डीजलनहीं है। कहा गया कि पर्याप्त डीजल नहीं होने के कारण अस्पताल परिसर में खड़ा है। ज
काफी देर गुहार लगाने के बाद मरीज के परिजन जच्चा बच्चा को लेकर पैदल ही अस्पताल से निकल पड़े। जो बच्चा मात्र दो घंटे पहले दुनिया में आया उसे एक एम्बुलेंस नहीं मिला। इधर पीएचसी प्रभारी डॉ मनोरंजन से इस संबंध में पूछा गया तो घिसा पिटा बहाना बनाने लगे। वह मरीज के परिजनों को ही दोष देने लगे।
उन्होंने बताया कि एक सप्ताह पूर्व ही इसकी सूचना जिला को दे दी गयी कि एम्बुलेंस के लिए इंधन की व्यवस्था नहीं है। एम्बुलेंस एनजीओ द्वारा चलाया जता हैं। फिर भी उक्त मरीज को पहुचाया जाता लेकिन उसके परिजन अपने मन से लेकर चले गए है। प्रभारी अपनी कमी का ठिकरा मरीज पर फोड़ते नजर आए।