Gaya News : बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों का ड्रॉपआउट यानी बच्चों का स्कूल छोड़ने के मामले में लगातार वृद्धि देखी गई है. इसे रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने कई कदम उठाए हैं. बावजूद सरकारी विद्यालय से ड्रॉपआउट बच्चों के संख्या में कमी नहीं आ रही है.
कुंदन कुमार/गया. बिहार के सरकारी स्कूलों में बच्चों का ड्रॉपआउट यानी बच्चों के स्कूल छोड़ने के मामले में लगातार वृद्धि देखी गई है. इसे रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने कई कदम उठाए हैं. बावजूद सरकारी विद्यालय से ड्रॉपआउट बच्चों के संख्या में कमी नहीं आ रही है.
बच्चों के ड्रॉपआउट के मामले को कम करने के लिए शिक्षा विभाग बच्चों के माता-पिता की काउंसलिंग करने की योजना थी लेकिन यह धरातल पर नहीं दिख रहा है. यही वजह है कि पांचवी कक्षा के बाद ड्रॉपआउट बच्चों की संख्या अधिक है. हम आपको गया जिले के एक ऐसे गांव की कहानी बताने जा रहे हैं जहां इस गांव के सभी बच्चे पांचवी कक्षा की पढ़ाई पूरा करने के बाद ड्रॉप आउट हो जाते हैं.
पहाड़ों के बीच में बसा भुपनगर गांव, जानें को सड़क नहींजी हां यह पूरी कहानी जिले के आमस प्रखंड क्षेत्र के भुपनगर गांव की है. दरअसल भुपनगर गांव पहाड़ों के बीच में बसा हुआ है और इस गांव में जाने के लिए कोई सड़क नहीं है. यहां के लोग पथरीली और जंगली रास्ते से होकर स्थानीय बाजार या प्रखंड मुख्यालय आमस पहुंचते हैं. आमस से भुपनगर की दूरी लगभग 7 किलोमीटर है.
इस गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है जहां पर कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों की पढ़ाई होती है, लेकिन 5वीं की पढ़ाई पूरा करने के बाद इस गांव के बच्चे आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते. इसके पीछे वजह यह है कि यह गांव जंगल और पहाड़ों में बसा हुआ है. आसपास कोई भी माध्यमिक या हाई स्कूल नहीं है. पथरीली और जंगली रास्ता तथा दूसरे स्कूल की दूरी अधिक होने के कारण यहां के छोटे छोटे पांचवी पास बच्चे आगे की पढ़ाई नहीं करना चाहते.
पांचवी के बाद सिर्फ 8-10 बच्चे ही आगे की पढ़ाई कर सकेइस गांव मे तकरीबन 400 से अधिक लोग हैं. सभी महादलित समुदाय से आते है. गांव मे शिक्षा को लेकर कोई जागरुक नही है. पिछले 20 वर्षो मे इस गांव के तकरीबन 200 लोगों ने पढ़ाई की, लेकिन पांचवी के बाद सिर्फ 8-10 बच्चे ही आगे की पढाई कर सके. वह भी दूसरे गांव मे रहकर. आज भी यहां कि स्थिति ऐसी है कोई आगे की पढ़ाई नहीं करना चाहता हालांकि शिक्षा विभाग में हुए कुछ बदलाव के बाद अब कुछ बच्चों का नामांकन स्कूल के द्वारा ही अन्य गांव स्कूल के छठी कक्षा में कराया गया है लेकिन बच्चे स्कूल नहीं जा पाते.
अभी तक सिर्फ 3 बच्चे ही इंटर पासगांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय भुपनगर के प्रभारी प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार ने बताया कि वह इस विद्यालय में पिछले 20 वर्षों से कार्यरत हैं और इन 20 वर्षों में गांव के 200 से अधिक लोगों ने पढ़ाई की, लेकिन इसमें से कुछ ही बच्चे आगे की पढ़ाई किए हैं. अभी तक इस गांव में सिर्फ 3 बच्चे इंटर पास किए हैं.
इन्होंने बताया कि गांव में आने जाने के लिए कोई सड़क नहीं है और यह गांव पहाड़ों के बीच में बसा हुआ है जिस कारण यहां के बच्चे दूसरे स्कूल में आने जाने से कतराते हैं और यही वजह है कि पांचवी कक्षा के बाद यहां के बच्चे ड्रॉप आउट हो जाते हैं. फिलहाल इस विद्यालय में कक्षा एक से पांचवी कक्षा के लिए लगभग 60 बच्चों का नामांकन है.
रास्ता नहीं होने के कारण वह दूसरे जगह आना जाना नहीं चाहतेवहीं जब न्यूज 18 लोकल ने गांव के कुछ ड्रॉपआउट बच्चों से बात की तो उन्होंने बताया कि वह आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं लेकिन रास्ता नहीं होने के कारण वह दूसरे जगह आना जाना नहीं चाहते. गांव के लोग तथा प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव में या आसपास कम से कम एक मध्य विद्यालय का निर्माण हो ताकि इस गांव के बच्चे आठवीं तक की पढ़ाई कर सकें.
जब बच्चे आठवीं तक की पढ़ाई कर लेंगे तो उनमें पढ़ाई को लेकर जागरूकता आएगी. आगे की पढ़ाई वह स्वयं कर सकेंगे. ऐसे में अब देखना दिलचस्प होगा कि गया जिला प्रशासन इस गांव के बच्चों के ड्रॉपआउट की संख्या को रोकने के लिए क्या कुछ कार्य योजना तैयार करती है.
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