SAHARSA NEWS: मनोरी गांव का यह पोखर जहां पिछले माह पानी था।
सालों भर पानी से लबालब रहने वाले आधे से ज्यादा पोखर-तालाबों के सूख जाने से मछली पालन के लिए भारी संकट, लगातार चलाना पड़ रहा मोटर।
तपिश जैसे-जैसे बढ़ रही है। वैसे-वैसे धरती पर इसका असर पड़ने लगा है। बढ़ते तापमान और बारिश के अभाव में जहां सोनबर्षाराज क्षेत्र स्थित तिलाबे व सुरसर नदियों के पानी का बहाव ठहर सा गया है। सालों भर पानी से लबालब रहने वाले आधे से ज्यादा पोखर तालाबों के सूख जाने से मछली पालन के लिए भारी संकट खड़ा कर रहा है। खेतों में लगी मक्के की फसल में पटवन की संख्या बढ़ जाने से खेती की लागत बढ़ गई है। ऐसा लग रहा है कि जैसे क्षेत्र सुखाड़ की तरफ बढ़ता जा रहा है। पानी के संकट पर मछली पालन व उसके बीज उत्पादन से जुड़े आशीष कुमार ने बताया कि मछली व उसके बीज बचाने के लिए अनवरत मोटर चलाना पड़ रहा है। मोटर से बोरिंग के द्वारा डिलेवरी पाइप से जहां पहले 3 इंच पानी की आपूर्ति होनी चाहिए थी, वहीं पानी का लेयर घट जाने से मात्र सवा दो इंच पानी आपूर्ति हो पा रही है। क्षेत्र के करीब दो हजार पोखरों में मछली पालन किया जाता था। लेकिन बारिश के अभाव में उसकी संख्या 3-4 सौ के करीब पहुंच गया है।
सुरसर और तिलाबे नदी के पानी में भी ठहराव
पंपिंग सेट के लिए बोरिंग करने वाले मिस्त्री प्रमोद मालाकार ने बताया कि पटवन के लिए खेतों में पहले मात्र 65 फीट बोरिंग करनी पड़ता था, लेकिन अब 80 फीट करनी पड़ रही हैं। यही स्थिति सुरसर व तिलाबे नदियों की है। इसके पानी में ठहराव सा आ गया है। जगह-जगह उभरे बालू के टीलों ने नदी के बहाव को बाधित कर दिया है। अगर बारिश का यही हाल रहा तो क्षेत्र में सुखाड़ की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।