महिलाओं ने पति की लंबी आयु के लिए की वट सावित्री पूजा
मधेपुरा से रामपुकार कुमार कि रिपोर्ट
पति की लंबी आयु के लिए महिलाओं ने वट सावित्री पूजा शुक्रवार को घैलाढ़ प्रखंड क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में महिलाएं सुबह से ही सज-धज कर बरगद के पेड़ के पास पूजा करने पहुंचीं। प्रखंड क्षेत्र के इलाकों में मौजूद कई वट वृक्षों के पास इस दौरान महिलाओं की काफी भीड़ रही।बरगद के वृक्ष के चारों ओर सूत के धागे के साथ परिक्रमा करते हुए महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु की कामना की। सुबह धूप कम रहने की वजह से महिलाओं की ज्यादा भीड़ नजर आई। चढ़ते सूरज के साथ भी महिलाओं की संख्या बढ़ती गई। गर्मी के असर से दूर महिलाएं वट वृक्ष की पूजा के लिए आतुर दिखीं। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा के बाद मंदिरों के दर्शन भी करतीं नजर आईं।पूरी तन्मयता से सावित्री-सत्यवान कथा का श्रवण कर उन्होंने अक्षय वट वृक्ष के चारों ओर घूमकर रक्षा सूत्र बांधा और आशीर्वाद मांगा। प्रखंड मुख्यालय बाजार व कस्बे के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं ने व्रत रख भगवान विष्णु की विधिविधान से पूजा-अर्चना की और उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद मांगा।महिलाएं सुबह से ही सज सवर कर घर में पकवान बनाने के बाद वट वृक्ष के नीचे पहुंची पूजा-अर्चना शुरू की। अक्षत रोली से तिलक करने के बाद महिलाओं ने पंचामृत से भगवान विष्णु का पूजन वंदन किया। वट वृक्ष में धागा लपेटते हुए महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना कर व्रत रखा। पूजन-अर्चन कर महिलाओं ने पति की दीर्घायु के साथ ही परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा अर्चना के बाद महिलाओं ने पंडित जी से वट सावित्री की कथा सुनी। सुबह से ही वट वृक्ष के नीचे महिलाओं की भीड़ लगने लगी थी। महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर विधिविधान से पूजन वंदन किया।हिंदू धर्म में महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री व्रत रखती है। यह पर्व हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आता है। इस दिन वट सावित्री व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है। इसलिए इस दिन का महत्व और बढ़ रहा है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्य पूर्ण होते हैं। इस पूजा को करने के लिए विशेष विधि-विधान है, जिसका पालन सख्ती से किया जाता है। वट सावित्री के पूजन सामग्री में बांस का पंखा, लाल कलावा, सुहाग का समान, मूर्तियां, धूप, दीप, घी, कच्चा सूत, चना, बरगद का फल, जल से भरा कलश आदि शामिल किया जाता है।