Love Story : बात साल 2006 की बात है, जब एक प्रोफेसर उनकी शिष्या का प्रेम सुर्खियां बटोर रहा था. यह जोड़ी टीवी चैनलों पर होने वाली डिबेट में शामिल होकर उनकी टीआरपी बढ़ा रहे थे. इसके चलते गुरुजी को काफी कुछ झेलना भी पड़ा. प्रेम की खिलाफत करने वाले कुछ लोगों ने गुरुजी के चेहरे पर कालिख तक पोती. यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर को निलंबित तक कर दिया. लेकिन दोनों एक दूसरे का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हुए. आज हम बात कर रहे हैं पटना विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रोफेसर मटुकनाथ और उनसे करीब 30 साल छोटी जूली की.
रिपोर्ट्स के अनुसार, मटुकनाथ और जूली साल 2007 से 2014 तक लिव इन रिलेशनशिप में रहे. इसके बाद द दोनों के बीच दूरियां आनी शुरू हो गई. साल 2013 तक तो दोनों के बीच सब कुछ ठीक ही रहा. लेकिन कहते हैं कि इसके बाद जूली का झुकाव आध्यात्म की ओर हुआ और वह कई आध्यात्मिक गुरुओं के संपर्क में आ गईं. उन्होंने कई आश्रमों में समय बिताया. मटुकनाथ बताते हैं कि वह गंदे लोगों के संपर्क में आ गई थी. इसी के साथ दोनों लोगों के बीच दूरियां भी बढ़ने लगी.
मटुकनाथ का जूली की की साधना पसंद नहीं आई. जिससे खाईं बढ़ती गई. एक दिन वह अपने परिवार के पाास सूरीनाम चली गईं. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जूली को उनके परिवार ने स्वीकार नहीं किया. इसके बाद जूली की एक सहेली उन्हें कैरेबियाई देश त्रिनिदाद में एक आध्यात्मिक गुरु के पास ले गई. लेकिन उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत बिगड़ती चली गई. इसी साल फरवरी में प्रकाशित विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जूली इस वक्त एक सरकारी अस्पताल में जीवन और मृत्यु से जूझ रही हैं.
इन दिनों कहां हैं मटुकनाथ
मटुकनाथ भी इस वक्त अकेले हैं. वह भागलपुर में अकेले रहते हैं. उनका कहना है कि जूली से प्यार के चलते उनके उनके भी परिवार ने उनका साथ छोड़ दिया था. मटुकनाथ के बेटे ने उनको कभी अपनी शक्ल तक नहीं दिखाई और पत्नी से भी कोई संबंध नहीं रह गया.
मटुकनाथ ने कई बार बुलाया भारत
रिपोर्ट्स के अनुसार, मटुकनाथ ने जूली को कई बार भारत बुलाया. लेकिन वह आने को तैयार नहीं हुईं. वह कहते हैं, उसे अब मेरे साथ नहीं रहना. वह मेरे बिना ही रहना चाहती है. यही वजह है कि मैं अपनी बची हुई जिंदगी अकेले गुजार रहा हूं.