पटना, राज्य ब्यूरो । हर घर नल का जल योजना के बारे में लगातार मिल रही गड़बड़ी की शिकायतों से आजिज राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों के मुखिया और वार्ड सदस्यों को जवाबदेह बनाने का फैसला किया है। सरकार ने साफ कर दिया है-इसके लिए मुखिया और वार्ड सदस्य सीधे तौर पर जिम्मेवार ठहराए जाएंगे। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। पद मुक्त होने के साथ जेल जाने की भी नौबत आ सकती है।
पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। कहा है कि जांच कर देखें कि किस पंचायत में हर घर नल का जल योजना के तहत पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। जांच में अगर आरोप सही पाया जाता है तो मुखिया और वार्ड सदस्य के खिलाफ पंचायती राज अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की अनुशंसा करें।
पत्र में कहा गया है कि ग्राम पंचायत के मुखिया वार्ड प्रबंधन समितियों के जरिए इस योजना का कार्यान्वयन कराते हैं। ग्राम पंचायत का मुखिया होने के नाते उपलब्ध कराई गई सरकारी राशि के समुचित उपयोग की जिम्मेवारी मुखिया की है। लक्ष्य यह है कि सरकारी धन से सृजित परिसंपत्तियों का लाभ जन साधारण को मिले। मुखिया इस पर ध्यान नहीं देते हैं और इसके चलते पेयजल की आपूर्ति बाधित होती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई हो। यह मुखिया के दायित्वों के निर्वहन में चूक की श्रेणी में आता है।
जिलाधिकारियों को कहा गया है कि वे जलापूर्ति योजना की नमूना जांच न करें। हरेक पंचायत में समीक्षा करें। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के हर घर में नल का जल पहुंचे। मालूम हो कि विधानसभा चुनाव के दौरान हर घर नल का जल योजना में धांधली की बहुत शिकायत मिली थी। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने योजना की समीक्षा की थी। उन्होंने गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे।
