चाणक्य के अनुसार मनुष्य को बुरे वक्त के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए. बुरा वक्त मनुष्य को मजबूत बनाता है. जिस प्रकार से अग्नि में तप कर सोना कुंदन बनता है उसी प्रकार से खराब समय मनुष्य को बहुत कुछ सीखा कर जाता है इसलिए बुरे वक्त से कभी भी घबराना नहीं चाहिए. बस कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए-
आत्मविश्वास कभी न खोएं
बुरे वक्त में मनुष्य को कभी भी अपने आत्म विश्वास को कमजोर नहीं होने देना चाहिए. क्योंकि आपका आत्म विश्वास ही बुरे वक्त से लड़ने में सबसे अधिक मददगार साबित होता है.
बुरा समय रिश्तों को समझाता है
चाणक्य के अनुसार मनुष्य को रिश्तों की सही समझ बुरे समय में ही होती है. जब बुरा वक्त आता है तो मतलबी और मौका परस्त लोग तुंरत साथ छोड़ देते हैं. जो लोग आपसे सच्चे मन से जुड़े होते हैं वही बुरे वक्त में साथ निभाते हैं. इसलिए बुरे वक्त में जो साथ खड़ा रहे उसका साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए.
धैर्य बनाए रखें
चाणक्य के अनुसार कितना भी बुरा वक्त क्यों न हो, मनुष्य को धैर्य नहीं खोना चाहिए. मन में एक उम्मीद और विश्वास बनाए रखना चाहिए. जीवन में दुख के बादल स्थाई नहीं होते हैं एक समय के बाद दुख को जाना ही होता है. लेकिन इस समय को मजबूती से मुकाबला करना चाहिए. मन में नकारात्मक विचारों को नहीं लाना चाहिए.
