कोसी प्रमंडल के बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं के समाधान के लिए बनाया गया कोसी पीड़ित विकास प्राधिकार का दफ्तर लापता हो गया है। पहले कभी यह दफ्तर सहरसा में हुआ करता था।
आज सरकार के आधा दर्जन से अधिक विभागों और प्राधिकार के पदेन अध्यक्ष सहित सदस्यों को भी जानकारी नहीं है कि इसका दफ्तर है कहां? इसका खुलासा आरटीआई से मांगी गई सूचना से हुआ है। आवेदक महेन्द्र यादव ने 11 जनवरी को मंत्रिमंडल सचिवालय के लोक सूचना पदाधिकारी सह संयुक्त सचिव से सूचना मांगी थी। उसके बाद से सूचना संबंधी पत्र जल संसाधन विभाग, कोसी प्रमंडलीय आयुक्त, सहरसा कलेक्ट्रेट, आपदा विभाग और डीडीसी दफ्तर में घूम रहा है लेकिन दफ्तर और प्राधिकार के संबंध में किसी विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है। बात यहीं खत्म नहीं हुई। निर्धारित समय पर सूचना नहीं मिलने के बाद आवेदक ने अपील की। अपीलीय आवेदन भी उसी तरह उन्हीन विभागों में चक्कर काट रहा है।
मंत्रिमंडल के निर्णय पर 1987 में बनाया गया था प्राधिकार
तत्कालीन मुख्यमंत्री बिन्देश्वरी दूबे के कार्यकाल में कोसी तटबंध के बीच बसे लोगों की सुरक्षा, उनके आर्थिक विकास और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए मंत्रिमंडल ने 30 जनवरी 1987 को कई निर्णय लिए थे। इसी निर्णय के तहत कोसी पीड़ित विकास प्राधिकार का गठन किया गया था। तत्कालीन कृषि मंत्री लहटन चौधरी, सांसद, पांच विधायक के अलावा योजना विकास आयुक्त, कृषि विकास आयुक्त, एचआरडी और समाज कल्याण आयुक्त, भूमि सुधार आयुक्त, सहाय्य एवं पुनर्वास सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त सहरसा, प्रमंडलीय आयुक्त दरभंगा, सहरसा डीएम और सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता सहित सचिव स्तर के कुछ और अधिकारी इसके पदेन सदस्य बनाए गए थे। लेकिन आज की तिथि में प्राधिकार के कौन अध्यक्ष हैं और कौन सदस्य के साथ-साथ इसका दफ्तर कहां है, की जानकारी किसी को नहीं है।