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Friday, September 4, 2020

मधेपुरा/CM नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट जगह-जगह हो रहा हैं ध्वस्त,बनते ही टूट कर बिखर जाती है......जानिए

मधेपुरा/CM नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट जगह-जगह हो रहा हैं ध्वस्त,बनते ही टूट कर बिखर जाती है......जानिए।
जी हाँ हम बात कर रहे हैं है हर घर नल जल योजना की,ये प्रोजेक्ट CM नीतीश का ड्रीम प्रोजेक्ट भी मानी जाती हैं, लेकिन आये दिन योजना में भ्र्ष्टाचार की वजह से ड्रीम प्रोजेक्ट ध्वस्त होता दिख रहा है.. कई जगह बनते ही टूट कर गिर जा रही है पानी की टंकी...
BY:-स्टालिन अमर अक्की(स्पेशल रिपोर्ट)

मधेपुरा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट सात निश्चय योजना से निर्मित पानी टंकी उद्घाटन के महज पांच दिनों के बाद ही ध्वस्त हो गई। मामला मुरलीगंज प्रखंड के बेलो का है, जहां टंकी पहला पानी को नहीं झेल पाया। नवनिर्मित पानी टंकी मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन के पांच दिन बाद ही टूट कर गिर गई।

बता दें कि बेलो पंचायत स्थित वार्ड संख्या आठ में 45.259 लाख रुपये की लागत से लगभग 250 परिवारों को हर घर नल-जल योजना के तहत स्वच्छ जल पहुंचाने के लिए पानी टंकी बनाई गई थी। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 28 अगस्त को रिमोट से किया था। उद्घाटन के बाद जब गुरुवार के दोपहर में पहली बार पानी भरा जाने लगा तो टंकी पूरी तरह से ध्वस्त हो कर नीचे गिर गई। ग्रामीण चितनारायन यादव, अनिल कुमार, नीरज कुमार, अरविद कुमार, मु. अली हुसैन, मु. फिरोज, नंदलाल मंडल, अर्जुन मंडल, भीम मंडल, सताराम मालाकार व अरुण यादव आदि ने संवेदक की लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही निर्माण में भारी अनियमितता बरतने का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों ने बताया कि जल नल योजना के तहत निर्माणाधीन पानी टंकी से पानी की सप्लाई नहीं हो पाई और वह टूट कर जमीन पर गिर गई। ग्रामीणों ने इसकी उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। नल जल योजना में हुई है अनियमितता जिले में नल जल योजना के तहत जमकर अनियमितता हुई है। बेलो तो एक उदाहरण है। कई जगहों पर शुभारंभ तो हो गया लेकिन लोगों को पानी नहीं मिल रहा है, जहां पानी सप्लाई भी हो रही है वहां दूषित पानी लोगों को मिल रहा है। जबकि एक-एक योजना पर 40 लाख से अधिक राशि खर्च की गई है। संवेदक योजना में जमकर अनियमितता कर रहे हैं। कोट बेलो में मरम्मत कर टंकी बदल दी गई है। पांच साल तक जो भी गड़बड़ी होगी उसका मेंटेनेंस किया जाएगा। रखरखाव पर 15 लाख रुपये पांच साल के दौरान खर्च होंगे।

-अनीश अफजल, कार्यपालक अभियंता, पीएचईडी, मधेपुरा