धार्मिक व्यवसायियों के हित में मंदिर खोलना जरूरी - ब्रजेश
बहुत ही दयनीय हो गई है मंदिर से जुड़े व्यवसाय करने वाले लोगों का हाल।
सिंघेश्वर के अधिकतर लोगों के आय का मुख्य स्रोत है मंदिर से जुड़ा व्यवसाय।
बिहार के देवघर कहे जाने वाले बाबा सिंघेश्वर नाथ मंदिर में पूजा आरम्भ करवाने हेतु मांग जोर पकड़ने लगा है. मंदिर से जुड़े व्यवसायियों के सुगबुगाहट के बाद जिले के भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष डॉ ब्रजेश कुमार सिंह ने सिंघेश्वर मंदिर खोलवाने की मांग हेतु बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष एवं सिंघेश्वर मंदिर न्यास समिति के अध्यक्ष सह जिलाधिकारी मधेपुरा के नाम पत्र लिखते हुवे मांग किया है कि चुकीं पटना जैसे भीड़ भरे इलाके में अवस्थित महावीर मंदिर को पूजा के लिए खोल दिया गया है तो इस मंदिर को भी क्यों नहीं खोला जा रहा है. ज्ञात हो कि विगत लॉक डाउन के लगने के तुरत बाद बिहार भर के मंदिरों को भी लॉक कर दिया गया है. कोरोना जैसी विश्वव्यापी महामारी से बचने के लिए पूजा पाठ पर भी रोक लगा दी गई है.वहीं इसी बाबत बाबा सिंघेश्वर मंदिर जो कि पुराण काल से अवस्थित है . उसे भी लॉक कर दिया गया है.जबकि इस मंदिर में भोले बाबा की पूजा समस्त बिहार वासी बिहार के देवघर के रूप में करते आ रहे हैं। और इन्हीं कारणों से यहां पर पूर्व से बसे अधिकांश स्थानीय लोगों के आय का श्रोत मंदिर से ही जुड़ा हुआ है।जैसे अधिकांश लोग फूल ,बेलपत्र, प्रशादी और वस्त्र, श्रृंगार व्यवसाय एवं होटल ही करके अपना परिवार चलाते है।
मंदिर के बंद हो जाने से यहां के मंदिर से जुड़े व्यवसाय करने वाले लोग जो केवल इन्हीं व्यवसायों पर आश्रित है .उनको जीना दूभर हो गया है.और सरकार द्वारा ऐसे व्यवसाय के सहारे गुजर बसर करने वाले लोगों के लिए कोई अतिरिक्त सरकारी आर्थिक सहायता आदि भी नहीं दिया गया है. फिर भी ऐसे लोग मजबूरी बस सरकारी आदेश को मानते हुवे कर्ज के सहारे ही भरण पोषण कर रहे है .और जब विगत सप्ताह ही पटना के ऐतिहासिक महावीर मंदिर में पूजा आरम्भ होने की सूचना इनलोगो को मिली तो अब ये लोग अधेर्य से हो गए हैं .और इसी का हवाला देते हुवे भाजयुमो नेता डॉ ब्रजेश सिंह ने कहा है कि चुकी पटना जैसे राजधानी के भीड़ भरे जगह पर अवस्थित महावीर मंदिर में जब लॉक डाउन में पूजा आरम्भ करवा दिया गया है .तो यहां भी सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए पूजा आरंभ करने की अनुमति दिया जाए. जिससे यहां के स्थानीय व्यवसायियों को भरण पोषण में अब और दिक्कत ना हो सके।