सहरसा। यह सहरसा है, लेकिन शहर सा आज भी नहीं दिखाई देता है। बेशक कहने को तो प्रमंडलीय मुख्यालय है, किंतु यहां सड़क और जलजमाव समेत कई समस्याएं अधूरी विकास की गाथा को बयां करती है। शहर की सबसे बड़ी समस्या जाम की है। इससे निजात के लिए पिछले 20 वर्षों से आंदोलन होता रहा। तीन-तीन रेल मंत्रियों ने ओवरब्रिज का शिलान्यास किया, लेकिन अबतक निर्माण के लिए एक ईंट भी नहीं रखी जा सकी जा सकी है। कभी रेलवे को इसके निर्माण की जिम्मेवारी थी। लेकिन अब बिहार राज्य पुल निर्माण निगम को निर्माण का भार दे दिया गया है। कितु निगम में भी एक माह से अधिक समय से स्वीकृति के लिए डीपीआर अटका हुआ है। कहने को तो हर नेता इस ओवरब्रिज को चुनाव में मुद्दा बनाते हैं। बावजूद न तो ओवरब्रिज बन सका और न ही लोगों को जाम से निजात मिल पाया है।
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इन मंत्री ने किया था शिलान्यास
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शहर के बंगाली बाजार में ओवरब्रिज का निर्माण ऐसा मामला है जिसके निर्माण का शिलान्यास तीन मंत्री कर चुके हैं। शायद यह पहला मामला होगा जिसका तीन रेल मंत्री द्वारा शिलान्यास के बाद नींव तक नहीं डाली जा सकी। जानकारी के अनुसार ओवरब्रिज निर्माण के लिए 22 अप्रैल 2000 को पूर्व रेल राज्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पहली बार शिलान्यास किया। उस समय निर्माण की लागत 9.35 करोड़ थी। पांच साल बाद फिर चुनाव के समय में 12 जून 2005 को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसका शिलान्यास किया। उस समय लागत 15 करोड़ तय की गई। इसी दस साल बाद लोकसभा चुनाव से पहले 22 फरवरी 2014 को पूर्व रेल राज्य मंत्री अधीर रंजन चौधरी ने उस समय के सांसद शरद यादव की मौजूदगी में इसका शिलान्यास किया और लागत राशि 57.54 करोड़ तय की गई। दो बार रेल बजट में दस-दस लाख राशि का प्रावधान भी किया गया। इसी तरह पूर्व सांसद पप्पू यादव ने भी निर्माण का प्रयास किया, परंतु सफलता नहीं मिली। अब इसका जिम्मा पुल निर्माण निगम को सौंपा गया है और अनुमानित लागत 170 करोड़ तय की गई है। पुल निर्माण निगम की मानें तो डीपीआर बनाकर प्रशासनिक स्वीकृति के लिए भेज दिया गया, कितु स्वीकृति नहीं मिल पाई। अब विस चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। आचार संहिता लागू हो गया है। जिसके कारण निर्माण अब चुनाव के बाद ही शुरू होने की संभावना दिख रही है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
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पुल निर्माण निगम के सहायक अभियंता प्रतीक कुमार कहते हैं कि डीपीआर बनाकर प्रशासनिक स्वीकृति के लिए अगस्त माह में ही विभाग के मुख्यालय को भेजा गया था। स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी। पूर्व मध्य रेलवे के डीआरएम अशोक माहेश्वरी कहते हैं कि आरओबी निर्माण के लिए तैयार संशोधित जीडीए को रेलवे ने अगस्त में ही स्वीकृति दे दी थी। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम को आरओबी का निर्माण कराना है।
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क्या कहते हैं लोग
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बस्ती निवासी महताब आलम कहते हैं कि जाम की समस्या विकराल हो गई है। समय के साथ-साथ रोज लाखों का पेट्रेाल-डीजल जाम में खपत हो जाता है। राजनेताओं को सिर्फ वोट के समय इसकी याद आती है। डीबी रोड के रंजन कुमार ठाकुर कहते हैं कि बंगाली बाजार ही नहीं गंगजला, पोलिटेक्निक ढाला, मधेपुरा ढ़ाला पर भी ओवरब्रिज का निर्माण आवश्यक है। तभी जाम से मुक्ति मिल सकती है। सूरज कुमार ने कहा कि यहां के नेताओं को पड़ोसी जिले सुपौल के नेताओं से सीख लेने की जरूरत है। वहां घोषणा के साथ ही लोहियानगर में ओवरब्रिज बनने लगा। यहां तो सिर्फ विकास के नाम पर हवाबाजी की जाती है। विकास कुमार ने कहा कि जाम, जलजमाव और जर्जर सड़क सहरसा की पहचान बन चुकी है। इससे निजात तभी संभव होगा जब जनता कर्फ्यू लगेगा। नहीं तो नेताओं के कानों तक आवाज नहीं पहुंच पाएगी।